विनियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जरनल (सेवानिवृत्त) अतुल कौशिक ने कहा कि कई कोचिंग संस्थानों में फैकल्टी पर भी कोई निगरानी नहीं है। कई संस्थानों में अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों के रेगुलर शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं जबकि यह नियमों के खिलाफ है।
हिमाचल के निजी कोचिंग संस्थानों की चल रही मनमानी पर सरकार ने अभी तक कोई नियंत्रण नहीं रखा है। निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के पास अभी तक सिर्फ एक ही कोचिंग संस्थान के खिलाफ शिकायत आई है। प्रदेश भर में दर्जनों बड़े कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं और अभी तक प्रदेश सरकार का इन पर कोई नियंत्रण तक नहीं है। लिहाजा इन कोचिंग संस्थानों के प्रबंधन मनमानी करते रहे हैं।
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इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की अव्यवस्था से संबंधित शिकायतों पर कोई सुनवाई तक नहीं होती। इन शिकायतों को लेकर छात्र और अभिभावक आयोग के पास भी शिकायतें ले जाने से परहेज करते हैं। ये कोचिंग संस्थान खोल तो रखे हैं लेकिन बुनियादी ढांचा तक उपलब्ध नहीं है। कई संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों के बैठने की व्यवस्था सही नहीं है। इसके अलावा कई अन्य दिक्कतें भी छात्रों को झेलनी पड़ रही हैं।
कोचिंग संस्थानों में कई खामियां
प्रदेश के कई कोचिंग संस्थानों में खामियां होने के बाद भी आयोग के पास शिकायत नहीं कर पाते। इन संस्थानों में कोचिंग के नाम पर मोटी धनराशि वसूली जाती है। संस्थानों में फीस ढांचा तय नहीं रखा है। फीस के नाम पर हर संस्थान अपने हिसाब से राशि वसूलता रहा है। इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बुनियादी ढांचा तक उपलब्ध नहीं है। एक कमरे में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाता है।
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हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जरनल (सेवानिवृत्त) अतुल कौशिक ने कहा कि कई कोचिंग संस्थानों में फैकल्टी पर भी कोई निगरानी नहीं है। कई संस्थानों में अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों के रेगुलर शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं जबकि यह नियमों के खिलाफ है। कोचिंग संस्थानों के पास बुनियादी ढांचा नहीं है। फीस भी मनमाने तरीके वसूली जाती है और कोई फैकल्टी रिकॉर्ड को छुपाया जाता है।