प्रदेश के बागवानों को बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा और सरकारी नर्सरियों में तैयार नई किस्मों के सेब सहित अन्य फलदार पौधे मिलेंगे। इसमें सेब, नाशपाती, पलम, खुमानी, आड़ू, अखरोट, चैरी, जापानी, कीवी और अन्य फलदार पौधों की 30 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। बागवानों को सस्ते दाम पर पौधों को मुहैया करवाया जा रहा है।
बागवान को पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर पौधे मिलेंगे। बागवानों को 15 दिसंबर से पंजीकरण करना होगा। इसके बाद अनुसंधान केंद्र बजौरा की ओर से पौधे बांटने की प्रक्रिया 20 दिसंबर से शुरू होगी। इस बार अनुसंधान केंद्र में लगभग 38 से 40 हजार पौधे बांटे जाएंगे। जबकि अन्य पौधे पंजीकृत और सरकारी नर्सरियों के माध्यम से लाहौल, मंडी, शिमला चंबा, सोलन और जम्मू-कश्मीर के लिए पौधे भेजे जाएंगे।
पौधों के लिए मौसम अनुकूल, मार्च तक चलेगा काम
सेब बगीचों में विभिन्न पौधे लगाने का काम दिसंबर से लेकर मार्च तक चलेगा। इन दिनों पौधों को लगाने के लिए मौसम अनुकूल है। कुल्लू जिले में करीब 73 हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचे हैं। अनुसंधान केंद्र बजौरा में हर साल बागवानों को बेहतरीन किस्मों के फलदार पौधों को किफायती दामों पर मुहैया करवाया जाता है।
अमेरिकन सेब के भी मंगवाए जा रहे पौधे
अब विभाग बागवानों के लिए अमेरिकन सेब के पौधे भी मंगवा रहा है। इसका वितरण भी बागवानों को जल्द होगा। इन पौधों में सुपर चीफ, सकालेट स्पर, सेलेट स्पर अरली रेड और जिंजर गोल्ड किस्में शामिल रहेंगी। इस सेब को पौष्टिक माना जाता है और देर तक ताजा रहता है।
क्षेत्रीय बागबानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के फल वैज्ञानिक डॉ. विजय भारद्वाज ने बताया कि इस बार नई प्रजाति के पौधे तैयार किए गए हैं। इनकी कुल संख्या लगभग 38 से 40 हजार है। वहीं नर्सरी में कार्य करने वाले सुर्दशन और सुनील ने बताया कि यहां पर तैयार किए लाखों पौधों को प्रदेश के जिलों में भेजा जाएगा।