सेब आयात शुल्क बढ़ाने और बरकरार रखवाने में हाथ खडे़ कर चुकी मोदी सरकार ने हिमाचल के बागवानों को एक और झटका दिया है। एमओयू होने के बावजूद केंद्र सरकार ने सेब के शीत भंडारण के लिए सीए स्टोर बनाने के तीन प्रोजेक्ट खारिज कर दिए हैं।
ये कंट्रोल्ड एटमोसफियर (सीए) स्टोर खड़ापत्थर, पतलीकूहल और चुराह में बनाए जाने थे। तीनों सीए स्टोर में सेब की सवा लाख पेटियों (कार्टन) का भंडारण होना था। एक ओर तो हाल ही में भारत सरकार ने पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर को 500 करोड़ का विशेष बागवानी पैकेज दिया है।
वहीं हिमाचल के महज 16.81 करोड़ के सीए प्रोजेक्ट समझौते के बाद खारिज कर दिए हैं। बहाना धन की कमी का है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एजेंसी एपीडा की अध्यक्ष अनीता प्रवीण ने प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा को पत्र लिखकर तीनों प्रोजेक्टों की ग्रांट-इन-एड खारिज करने की सूचना दी है।
तीन प्रोजेक्ट रद्द, बाकी चार भी अटके
शिमला के खड़ापत्थर सीए स्टोर को 4.87 करोड़, कुल्लू के पतलीकूहल सीए स्टोर को 8 करोड़ और चंबा के चुराह सीए स्टोर को 3.94 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। खड़ापत्थर, पतलीकूहल में 50-50 हजार और चुराह में 25 हजार पेटियों की भंडारण क्षमता प्रस्तावित थी।
वैसे हिमाचल के कुल सात प्रोजेक्टों को भारत सरकार से मंजूरी आई थी। ये चुराह, खड़ापत्थर, अणु, नादौन, जड़ोल-टिक्कर, रोहडू़ और बाघी थे। इनमें से तीन तो जुब्बल-कोटखाई से ही थे। सात में से तीन प्रोजेक्टों खड़ापत्थर, चुराह और पतलीकूहल का एचपीएमसी और एपीडा के बीच 20 नवंबर 2016 को बाकायदा एमओयू साइन हुआ।
अब ये तीनों खारिज हो गए हैं। चार अन्य प्रोजेक्ट भी अटके हुए हैं। वहीं, प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने इसकी पुष्टि की कि केंद्र सरकार ने इन तीनों प्रोजेक्टों को रद्द कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार से पुनर्विचार करने का आग्रह किया जा रहा है।