स्टाफ की कमी से भी हो रही है दिक्कत
टुटू-मजठाई पंचायत में सचिव के अलावा सभी पद रिक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। केंद्र से मैटीरियल कंपोनेंट की राशि प्राप्त न होने और पंचायतों में स्टाफ की कमी के चलते मनरेगा कार्य लटक गए हैं। पंचायतों के बहुत से ऐसे कार्य हैं जो शुरू ही नहीं किए जा सके हैं। वहीं जो शुरू हुए थे वह आधे अधूरे हैं।
शहर से सटी पंचायत टुटू-मजठाई में सचिव को छोड़कर अन्य सभी स्वीकृत पद खाली हैं। इसमें ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक और चौकीदार का पद कई सालों से रिक्त है। पंचायत टुटू-मजठाई के प्रधान उत्तम कश्यप ने बताया कि संबंधित विभाग के साथ स्टाफ की कमी का मामला उठाया था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस प्रकार जहां एक ओर समय पर धनराशि प्राप्त न होने और स्टाफ की कमी के चलते पंचायतों की विभिन्न विकासात्मक गतिविधियां प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर इन कार्यों के संचालन के लिए जिम्मेवार कर्मचारियों को उनकी क्षमता से अधिक कार्यभार सौंपा जा रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सामाजिक कल्याण योजना है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अकुशल श्रम कंपोनेंट के तहत 100 फीसदी वित्त पोषण करती है। निर्माण सामग्री पर होने वाले व्यय को केंद्र और राज्य 75 और 25 फीसदी के अनुपात में वहन करती हैं। उत्तम कश्यप ने बताया कि केंद्र से 75 प्रतिशत मैटीरियल कंपोनेंट राशि का हिस्सा प्राप्त न होने से वर्ष 2025-26 की मनरेगा शेल्फ में प्रस्तावित कार्य अटक गए हैं। ग्रामीण विकास कार्यक्रमों विशेषकर मनरेगा योजना के संचालन के लिए स्वीकृत लगभग 50 से 75 प्रतिशत कर्मियों के पद खाली हैं। एक-एक ग्रामीण रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक को 4 से 7 पंचायतों का कार्य आवंटित किया गया है।