प्रदेश विश्वविद्यालय की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर छात्र संगठनों के सवाल उठाने के बाद अब यह मामला राजभवन में पहुंच गया है। विधायक एवं विवि कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य सुरेश भारद्वाज ने भी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर विवि में चल रही भर्ती प्रक्रिया मामले में हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने की मांग की है।
विधायक ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि विवि के विज्ञापित पदों को यूजीसी के तय मानकों के तहत ही भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें सहायक आचार्य के पद के लिए नेट/ सेट और यूजीसी रैग्यूलेशन 2009 के तहत पीएचडी डिग्री धारक पात्र माने गए हैं।
लेकिन 2012 में इन रिक्त पदों को भरने के लिए रखी रखी इन्हीं शर्तों को उस दौरान वर्तमान सरकार ने गलत करार दिया था। दबाव में विवि ने पूर्व में 37 पदों के लिए हुए साक्षात्कार को यह कहकर खारिज कर दिया था कि ये भर्ती तय शर्तों के मुताबिक नहीं हुई है।
मामला अब उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट का फैसला अभी नहीं आया है। आरोप है कि विवि प्रशासन द्वारा कोर्ट में दाखिल किए हलफनामे में सहायक आचार्य पद के लिए पात्रता शर्तें नेट/सेट रखा है लेकिन साक्षात्कार इस हलफनामे के विपरीत करवाए जा रहे हैं।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने 2012 में करवाए साक्षात्कारों की प्रक्रिया को गैर कानूनी तरीके से राजनीतिक दबाव में आकर खारिज किया था। अब तक इन 37 पदों के साक्षात्कार के लिफाफे नहीं खोले गए हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर विवि पूर्व में उन्हीं नियमों के तहत हुए साक्षात्कार पर हलफनामा देकर गलत करार दे खारिज करवा रहा है और दूसरी ओर उन्हीं पदों के लिए पुरानी शर्तों पर ही साक्षात्कार करवा रहा है। यह गलत है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता तब विवि में चल रही साक्षात्कार प्रक्रिया को स्थगित करवाया जाए।