माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकार का हस्तक्षेप न होने से सेब के दामों में भारी गिरावट आई है। बागवानों को साल की मेहनत के बाद फसल औने-पौने दाम में बेचनी पड़ रही है। बुधवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में सिंघा ने कहा कि सरकार ने बागवानों को दिए जाने वाले अनुदान पर रोक लगा दी है। इसका असर कार्टन और ट्रे की कीमतों पर पड़ा।
बारदाना खरीदना बागवानों की पहुंच से बाहर हो गया है। मजबूरी में अपनी उपज निजी कंपनियों को बेचनी पड़ रही है। कंपनियां मालामाल और किसान का शोषण हो रहा है। सरकार को एपीएमसी के जरिये सेब के दामों को नियंत्रित करना चाहिए था, लेकिन एपीएमसी आढ़तियों से वसूली का जरिया बन गई है। आढ़तियों से खुलेआम पैसा इकट्ठा किया जा रहा है। मंडियों में बोली 1,800 की लगे तो 1,750 पर छूटती है। कोई पूछने वाला नहीं है।
विधानसभा में बार-बार बागवानी का मुद्दा उठाया, लेकिन सरकार अनभिज्ञ बनी रही। सरकार और सरकार का तंत्र लूटने वालों के पक्ष में खड़ी है, इसलिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना जरूरी है। शिमला के लिए पानी की व्यवस्था कंपनी को सौंपने के बाद अब सरकार बिजली बोर्ड को डुबाकर बिजली व्यवस्था अडाणी अंबानी के पास गिरवी रखने की तैयारी में है। इसे बचाने के लिए भी आंदोलन होगा।
गांधी धरने पर बैठे, तब भागे अंग्रेज
सिंघा ने कहा कि विरोधी उन्हें धरने वाला विधायक कहते हैं, गांधी ने भी देश के लोगों की चेतना को जगाने और अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए धरने दिए, उपवास रखे। तब जाकर लोग सड़कों पर उतरे और देश आजाद हुआ। 5 अगस्त के किसान बागवानों के आंदोलन के बाद ही सरकार को कीटनाशकों पर अनुदान बहाल करना पड़ा।
वामधारा के सहयोग से बनेगी विधानसभा
सिंघा ने दावा किया कि इस बार वामधारा के सहयोग से ही विधानसभा बनेगी। बोले, पिछली बार विधानसभा में अकेला था इस बार टीम के साथ जाऊंगा। ओपीएस, राइडर, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, सेब के मुद्दे पर प्रदेश के लोग वामधारा को विधानसभा में भेजेंगे।