जिला मंडी में जमीनों की रजिस्ट्री के नाम पर भी एक करोड़ रुपये का गड़बड़झाला सामने आया है। गत सप्ताह सदर, बल्ह, सुंदरनगर और जोगिंद्रनगर तहसील कार्यालयों में उपायुक्त अरिंदम चौधरी और अन्य अधिकारियों ने औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पकड़ी थीं। जांच के बाद जमीन के क्रय-विक्रय की रजिस्ट्रियों में करीब एक करोड़ की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह व प्रधान सचिव (राजस्व) को भेज दी है। संबंधित तहसीलदारों, डीड राइटर्स और पटवारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है, जिसमें सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।
उचित जवाब न मिलने पर लापरवाह अधिकारियों से रिकवरी होगी और निलंबन की गाज भी गिर सकती है। गड़बड़ियां किस तरह की हैं, कार्रवाई से पहले पूरी रिपोर्ट के खुलासे को लेकर प्रशासन बताने को तैयार नहीं। बता दें कि शिकायतों पर उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी राजीव कुमार व जिला राजस्व अधिकारी राजीव सांख्यान ने चारों तहसीलों का औचक निरीक्षण किया था। जमीन के क्रय-विक्रय से संबंधित रिकॉर्ड खंगालने पर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद मामले की जांच के लिए उपायुक्त ने अधिकारियों की एक टीम गठित की थी। रिकॉर्ड खंगालने के बाद सरकारी राजस्व को करीब एक करोड़ की चपत लगने की बात सामने आई है।
जमीन की कीमत कम बताई और स्टांप भी कम लगाया
इन मामलों में अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को चूना लगा है। इन मामलों में जमीन की कीमत कम बताकर और स्टांप कम लगाकर हेरफेरी को अंजाम दिया गया है। पूरे प्रकरण में शामिल तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों , डीड राइटर्स व ग्रामीण राजस्व अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है। सबसे अधिक गड़बड़झाला सदर तहसील में बताया जा रहा है।