मिंजर मेले के समापन चार अगस्त को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। मुख्यमंत्री मंजरी गार्डन से प्रतीक के रूप में नारियल विसर्जित करेंगे। पहले यहां पशुबलि की प्रथा थी। जीवित भैंसे को रावी नदी में छोड़ा जाता था। बलि पर प्रतिबंध लगने के बाद यह प्रथा प्रतीक रूप में होती है।
मिंजर मेले में इस बार भी कई राज्यों के व्यापारी चंबा पहुंचे हैं। हर साल मिंजर मेले में करोड़ों का कारोबार होता है। मिंजर मेले के दौरान हस्तशिल्प का सामान खास तौर पर यहां बिकता है।
मुगलकाल में शाहजहां के शासनकाल में 1641 में राजा पृथ्वी सिंह भगवान रघुनाथ के चिह्न को चंबा लाए थे। शाहजहां ने मिर्जा साफी बेग को राजदूत के रूप में चंबा भेजा था। मिर्जा परिवार जरी और गोटे के काम में निपुण था। साफी बेग ने भगवान रघुनाथ को मिंजर चढ़ाई और यह परंपरा शुरू हो गई। राजा पृथ्वी सिंह के एलान के बाद यहां मेला शुरू हुआ जो आज तक कायम हैं।