जल, जंगल और जमीन को बचाने तथा किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया करवाकर आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई वाटरशेड परियोजनाओं के लिए बजट की अगली किस्त वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर मिलेगी। केंद्र और राज्य सरकार की 90 अनुपात 10 प्रतिशत बजट पर आधारित इन योजनाओं के मूल्यांकन के लिए वैज्ञानिकों की टीम हिमाचल पहुंच गई है।
इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर ही वाटरशेड परियोजनाओं के लिए आगामी बजट तय होगा। केंद्र ने वाईयूएमडीए नामक वॉलंटरी आर्गेनाइजेशन को इस कार्य का जिम्मा सौंपा है। बिलासपुर की वाटरशेड परियोजनाओं के निरीक्षण के लिए नाहन से देवा एग्री क्लीनिंग एंड एग्री बिजनेस सेंटर के कृषि वैज्ञानिक बीडी मिश्रा बिलासपुर पहुंचे हैं।
उन्होंने जिले में बन रही विभिन्न वाटरशेड परियोजनाओं का निरीक्षण किया है। इसकी रिपोर्ट वह सीधा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को सौंपेंगे। डा. बीडी मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार ने वाटरशेड परियोजनाओं की मूल्यांकन चेकिंग का जिम्मा वाईयूएमडीए को सौंपा है। उनकी टीम कुल्लू, ऊना, पालमपुर आदि के लिए भी गई है।
डा. मिश्रा ने बताया कि वाटरशेड परियोजनाएं अति महत्वपूर्ण है। इससे जहां जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा होगी। वहीं, इससे किसानों की आर्थिक स्थित में भी सुधार होगा। उनके अनुसार पर्यावरणीय असंतुलन के कारण मुख्य फसलें विलुप्त होने लगी हैं। वाटरशेड परियोजनाओं से ऐसी फसलों को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। बिलासपुर में बन रही परियोजनाओं सराहनीय है।
डीआरडीए के परियोजना अधिकारी सुभाष गौतम ने बताया कि बिलासपुर में 12 वाटरशेड परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। इनकी कुल लागत 48 करोड़ रुपये हैं। इनसे इलाके की कुल 74 पंचायतें लाभान्वित होंगी। आठ को बजट मिल गया है।