हिमाचल सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को अब सत्ता से बाहर हुई यूपीए सरकार की स्कीमें बंद होने का खौफ सता रहा है। इसी असमंजस में कई कैबिनेट मंत्री दफ्तर ही नहीं आ रहे। जो आ रहे हैं, वे अपने विभाग की समीक्षा से अभी बच रहे हैं। आमतौर पर चुनाव अभियान के लंबे अंतराल के बाद मंत्री अपने विभागों की समीक्षा करते हैं।
हालांकि, यूपीए सरकार की योजनाओं पर नरेंद्र मोदी सरकार का रुख 26 मई को उनके शपथ ग्रहण के बाद ही पता चलेगा। बुधवार को सचिवालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा और विद्या स्टोक्स उपस्थित थे।
अनिल शर्मा ने बताया कि वह दफ्तर में तो हैं, लेकिन काम के नजरिए से अब केंद्र सरकार के रुख पर सब टिका है। ग्रामीण विकास विभाग में मनरेगा सबसे बड़ी स्कीम है। यदि इसमें बदलाव हुआ तो यह विभाग सीधे तौर पर प्रभावित होगा। इसलिए अब इंतजार कर रहे हैं।
हिमाचल को मिलते हैं 1200 करोड़
हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य को हर साल 1200 करोड़ रुपये केंद्रीय योजनाओं में आते हैं। इनमें से मुख्य स्कीमें मनरेगा, सर्व शिक्षा अभियान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, वाटरशेड, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता स्कीम, ई-गवर्नेंस, एड्स नियंत्रण, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, पंचायत युवा क्रीड़ा खेल अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम और रूसा इत्यादि शामिल हैं।
इनमें से कितनी योजनाओं में बदलाव होगा, ये अभी साफ नहीं है। एक तथ्य यह भी है कि इन स्कीमों के तहत सरकार के बजाए सीधा नोडल एजेंसी को धन आ रहा है और इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था न होने के कारण कैग ने भी आपत्ति जताई है।
बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं
सचिवालय में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि अब सचिवालय के साथ साथ जिलों में भी बदलाव होगा। कुछ जिलों के उपायुक्त भी बुधवार को सचिवालय के चक्कर काटते देखे गए।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिल्ली से वापस लौटने के बाद इस बारे में कोई फैसला होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की ओर से बोर्ड-निगमों में चेयरमैन-वाइस चेयरमैन लगाए गए नेताओं को बुधवार को भी सचिवालय में बैठने की जगह नहीं मिली। हालांकि, जीएडी इस कोशिश में लगा है। बुधवार को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के नव नियुक्त उपाध्यक्ष रमेश चौहान ने राजभवन जाकर राज्यपाल उर्मिला सिंह से भी भेंट की।