पाकिस्तान की मेराज बेगम क्या देवभूमि में दफन होगी या नहीं इसका फैसला अब पाकिस्तान करेगा। दोनों मुल्कों क्या मोहब्बत की इबारत लिखेंगे? पाकिस्तान की एक बुजुर्ग महिला मेराज बेगम की जन्म स्थल चंबा में अंतिम सांस लेने की इच्छा तो रविवार को पूरी हो गई, लेकिन उनका जनाजा पड़ोसी देश के जवाब के बाद ही उठेगा।
उनकी इच्छानुसार उन्हें चंबा में दफनाने के लिए दो मुल्कों का पेंच फंस गया है। 20 अप्रैल को रिश्तेदारों के यहां चंबा आई 75 वर्ष की मेराज बेगम का रविवार को इंतकाल हो गया है। उन्हें दफनाने के लिए पाकिस्तान की अनुमति जरूरी है। ऐसे में चंबा अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद उनके शव को ताबूत में बंद कर रख दिया है।
जन्मस्थल में ही दो गज जमीन में दफन होने की थी अंतिम इच्छा
महिला के यहां रह रहे रिश्तेदारों ने जिला प्रशासन को उनकी अंतिम इच्छा के बारे में अवगत कराया। प्रशासन ने पाकिस्तान उच्चायोग से उन्हें दफनाने की अनुमति मांगी। जब तक पाकिस्तान से उनके परिजनों की अनुमति नहीं आती तब तक उनका जनाजा नहीं उठेगा।
मेराज बेगम पुत्री नाजिर मोहम्मद का जन्म 13 अक्तूबर 1941 को चंबा में हुआ था। उनके पिता आजाद हिंद फौज के सिपाही थे। बंटवारे के दौरान नाजिर मोहम्मद पाकिस्तान चले गए। जबकि मेराज और उनका छोटा भाई इकबाल चंबा में ही रह गए। 1982 में जब मेराज को अपने पिता के पाकिस्तान के कराची में होने का पता चला तो वह उनसे मिलने चली गईं और वहीं पिता के साथ रहने लगीं।
20 अप्रैल को वीजा लेकर आई थीं मेराज
20 अप्रैल 2015 को वीजा लेकर मेराज चंबा में अपने सगे संबंधियों के पास आकर रहने लगीं। वीजा की अवधि 27 मई मई तक थी। मेराज अविवाहित थीं। उनके माता-पिता, छोटे भाई और उनके बच्चों का पहले ही निधन हो चुका है।
वह दूर के रिश्तेदार के यहां रह रही थीं। वहीं, पुलिस अधीक्षक डीके चौधरी का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद यहां रह रहे महिला के रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बयान लिए गए हैं। आगामी निर्देश का इंतजार है।
परिजनों ने फोन पर भरी हामी: गनी
समाजसेवी अब्दुल गनी का कहना है कि महिला की अंतिम इच्छा पूरी होनी चाहिए। उम्मीद है कि सोमवार शाम तक पाकिस्तान की तरफ से इजाजत मिल जाएगी। दूरभाष पर पाकिस्तान में महिला के रिश्तेदारों से भी उनकी बात हुई है। दावा किया कि उन्होंने महिला को चंबा में दफनाने पर हामी भर दी है। लिखित मंजूरी का इंतजार है।
उपायुक्त चंबा एम सुधा देवी ने बताया कि महिला की मौत के संबंध में पाकिस्तान एंबेसी को सूचना दे दी गई है। उन्होंने जांच की बात कही है। अब वहां से पत्र मिलने के बाद ही महिला को दफनाया जा सकेगा। यदि पाकिस्तान में महिला के परिजनों ने शव मांगा तो उन्हें भेजना ही पड़ेगा।