वर्ष 2010 में वालदीविया ने घटना से संबंधित चार पेज का पत्र लिखा। इसमें उसने लिखा कि उसने रिंपोछे से आशीर्वाद लेने और डिस्क हर्निया समस्या के समाधान के लिए संपर्क किया। रिंपोछे ने उसे अपने घर पर बुलाया और लेट जाने के लिए कहा।
विश्वास कर बौद्ध लामा की बात मैंने मान ली। बौद्ध लामा ने पवित्र पेय बताकर मुझे नशीला पदार्थ दिया। इसके बाद बौद्ध लामा ने मुझसे छेड़छाड़ की। मैंने कांगड़ा पुलिस में घटना से संबंधित शिकायत की। दलाईलामा दफ्तर को इसकी प्रति भेजी। दलाईलामा दफ्तर ने बैठक करवाई।
इसमें डागरी रिंपोछे ने माफी मांगी। वालदीविया ने कहा कि जब बौद्ध लामा ने माफी मांगी तो मैं फिर पुलिस के पास नहीं गई। डागरी रिंपोछे तिब्बत से भागकर वर्ष 1982 में भारत आया था। डागरी ने ल्हासा के प्रख्यात बौद्ध लामा पारी दोरजे चांग के अवतार के रूप में पुनर्जन्म लिया है।