व्यापारी की ओर से बागवान जो बिल दिया गया, वह मुझे मिला है। रेट में इतना फर्क क्यों है। इसकी जांच होगी। बेशक सरकार ने मंडियों की निगरानी के लिए कृषि उत्पाद मंडी समितियां बनाई हों या फिर मार्केटिंग बोर्ड हो, लेकिन चुनाव के चलते ये संस्थाएं कोई एक्शन नहीं ले रहीं।
आरआरडी ऑर्चर्ड ठियोग के एक बागवान रविंद्र कुमार ने बताया कि वह गुरुवार को मंडी में फ्रेश चेरी लाए, मगर इसके रेट देखे तो वह चौंक गए। उन्हें 40 रुपये के हिसाब से इसका मूल्य मिला, जबकि मार्केट में यह डेढ़ से दो सौ रुपये में बेचा जा रहा है। बागवान ने इसकी शिकायत मार्केटिंग बोर्ड के प्रबंध निदेशक से भी की है।