हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सस्ती दवाइयों का स्टॉक खत्म हो गया है। इन अस्पतालों में चल रहे जनऔषधि केंद्रों में केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित 600 सस्ती दवाइयों में से करीब 400 दवाइयों का स्टॉक खत्म हो चुका है। इस समय मात्र 200 दवाइयां ही इन केंद्रों में उपलब्ध हैं।
अस्पतालों में उपचार के लिए आ रहे लोगों को अब बाजार से महंगी दरों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। दवाओं की कमी का कारण सरकारी कंपनियों में दवाओं का कम उत्पादन माना जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली स्थित माल गोदाम को बदलने व जनऔषधि के सॉफ्टवेयर में बदलाव के चलते भी दवाइयों की आपूर्ति नहीं हो रही है।
केंद्र सरकार ने जनऔषधि केंद्रों में दवाइयों की आपूर्ति के लिए पांच सरकारी दवा कंपनियों कर्नाटक एंटीबायोटिक, हिंदोस्तान एंटीबायोटिक, गुजरात केमिकल, बंगाल केमिकल और आईडीपीएल के साथ करार किया है।
इन कंपनियों में दवा उत्पादन कम हो रहा है, जबकि दवाओं की मांग ज्यादा है। उपभोक्ता संरक्षण समिति के चेयरमैन एडवोकेट सुशील शर्मा का कहना है कि मरीजों को जीवनरक्षक दवाइयों के अतिरिक्त सर्जिकल आइटम बाजार से कई गुणा सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाने के मकसद से प्रदेश में इन केंद्रों को खोला गया है। वर्तमान में यह महज खाली काउंटर साबित हो रहे हैं।
करीब छह वर्ष पहले देशभर में मरीजों को सस्ती दरों पर जीवन रक्षक दवाइयां और सर्जिकल आइटम उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने जनऔषधि केंद्र खोले। सूबे में भी तीन दर्जन से ज्यादा जनऔषधि केंद्र खुले थे, लेकिन दवाइयों की कमी के चलते कुछ केंद्र बंद हो चुके हैं। वर्तमान में 30 केंद्र चल रहे हैं, जिनमें 9 सरकारी क्षेत्र में, जबकि 21 निजी क्षेत्र में चल रहे हैं।
प्रदेश के सभी जनऔषधि केंद्रों में अगले दस दिनों में दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। दिल्ली स्थित माल गोदाम के शिफ्ट होने और सॉफ्टवेयर बदलने में देरी के चलते दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
- रोहित ठाकुर, नोडल ऑफिसर, जनऔषधि