अब हार्ट सर्जन बनने के लिए मेडिकल छात्रों को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में सीटीवीएस महकमे में चल रही एमसीएच की दो सीटों को मंजूरी दे दी है।
तीन साल के डिग्री कोर्स में पहला बैच बैठा है। अगस्त माह में एमसीआई की टीम ने मूलभूत सुविधाओं को लेकर आईजीएमसी का निरीक्षण किया। इसकी रिपोर्ट तैयार कर दो सीटों को चलाने की मंजूरी दे दी। मौजूदा समय में सीटीवीएस महकमे में पांच विशेषज्ञ डाक्टर हैं।
तीन मेडिकल स्टूडेंट एमसीएच कर रहे हैं। हर तीन साल बाद आईजीएमसी से दो हार्ट सर्जन बन कर निकलेंगे। अस्पताल में साल 2007 में ओपन हार्ट सर्जरी शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक महकमे ने करीब 1400 ओपन हार्ट सर्जरी सफलता पूर्वक की है। ऑपरेशन की सफलता दर 99 फीसदी है।
इससे पहले ओपन हार्ट सर्जरी के लिए मरीजों को दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ता था। इलाज पर लाखों खर्च होने के कारण गरीब मरीज इलाज से वंचित रह जाते हैं, लेकिन यहां गरीब मरीजों का निशुल्क ऑपरेशन होता है। मुख्यमंत्री राहत कोष से भी काफी मरीजों के आपरेशन किए हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के आपरेशन भी निशुल्क होते हैं।
क्या कहते हैं विभागाध्यक्ष
सीटीवीएस के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रजनीश पठानिया ने कहा कि पहली बार एमसीआई की ओर से एमसीएच की दो सीटों को मंजूरी दी है। एमसीआई की ओर से इस बारे में लिखित में सूचना दी है। अब तीन साल का यह डिग्री कोर्स मान्य होगा। इससे प्रदेश में ही हार्ट सर्जन तैयार हो पाएंगे।