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अवैध निर्माण वालों को झटका, नहीं नियमित होंगे भवन

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हिमाचल प्रदेश नगर और ग्राम योजना संशोधन अध्यादेश 2014 की आड़ में इन दिनों शहर में जमकर अवैध निर्माण हो रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ नगर निगम ने अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी की है। दस सितंबर के बाद शहर में हो रहे भवन निर्माण को अध्यादेश के तहत नियमित नहीं किया जाएगा।
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अवैध निर्माण की सूचना मिलने पर नगर निगम भवन मालिक को नोटिस देगा। नोटिस देने के बाद मौका निरीक्षण किया जाएगा। शिकायत सही पाए जाने पर भवन मालिक को चिह्नित कर लिया जाएगा। इन भवनों को अध्यादेश के तहत नियमित नहीं किया जाएगा। ऐसे भवन मालिकों के आवेदन भी नगर निगम स्वीकार नहीं करेगा।

निगम के वास्तुक योजनाकार केएस चौहान ने बताया है कि अध्यादेश की आड़ में शहर में इन दिनों अवैध निर्माण होने की शिकायतें मिल रही हैं। जुर्माना चुकाने को तैयार भवन मालिक जमकर डेविएशन कर रहे हैं। इसके चलते नगर निगम ने दस सितंबर के बाद भवन निर्माण करने वालों की धरपकड़ शुरू कर दी है।
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व्यावसायिक अवैध निर्माण को नियमित करना सबसे महंगा

व्यावसायिक अवैध निर्माण को नियमित कराना सबसे महंगा होगा। राजधानी में अगर 70 फीसदी तक डेविएशन करके निर्माण किया है तो व्यावसायिक भवन मालिक को भारी फीस चुकानी होगी।

कोर एरिया में जहां 24 से 25 लाख चुकाने पड़ेंगे वहीं सामान्य एरिया में 12 से 15 लाख तक फीस पड़ेगी। मर्ज एरिया में 8 से 10 लाख रुपये देने पड़ सकते हैं। घरेलू मकान की एक मंजिल नियमित करवाने के लिए मर्ज एरिया के लोगों को एक से डेढ़ लाख रुपये तक की फीस देनी पड़ेगी।

भवन नियमित करने के लिए शहरी विकास विभाग ने राजधानी को कोर, प्रतिबंधित, सामान्य और मर्ज एरिया में बांटा है। हर एरिया की फीस अलग होगी।

भवन नियमित करवाने की आड़ में जारी निर्माण कार्यों को जांचने के लिए नगर निगम ने विशेष टीमें भी गठित कर दी है। यह टीमें स्वयं भी शहर का औचक निरीक्षण करेगी।

वास्तुक योजनाकार नगर निगम केएस चौहान  ने कहा कि शिकायतें मिलने के बाद नगर निगम इस मामले पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। छानबीन करने पर अगर ऐसे मामले पाए जाते हैं तो अवैध निर्माण कार्य को लेकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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