ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1908 में बने इस ऐतिहासिक भवन में 2014 तक टाउनहाल भवन में नगर निगम कार्यालय चल रहा था। इस दौरान सरकार ने इस भवन के जीर्णोद्धार का फैसला लिया। तत्कालीन मेयर के विरोध के बावजूद टाउनहाल खाली करवाया गया और एमसी के सारे दफ्तर उपायुक्त कार्यालय परिसर में शिफ्ट कर दिए।
इसके बाद एशियन डेवलपमेंट बैंक की ओर से जारी आठ करोड़ रुपये से पर्यटन विभाग ने इसके जीर्णोद्घार का काम शुरू किया। यह काम 2017 तक पूरा होना था, लेकिन देरी के चलते यह काम अगस्त 2018 में जाकर पूरा हुआ। इसके बाद कई सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई कि इस ऐतिहासिक भवन में सरकारी दफ्तर खोलने की जगह इसका बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
कोर्ट ने सरकार से इसका प्लान देने को कहा। पहले प्लान रिजेक्ट भी हुआ। सरकार ने संशोधित प्लान भेजा, जिसमें मेयर-डिप्टी मेयर और आयुक्त के कार्यालय स्थापित करने की मांग की गई। साथ ही कैफे, सूचना केंद्र जैसे भी विकल्प दिए। शुक्रवार को कोर्ट ने इस पर अंतिम फैसला दे दिया।