नगर निगम शिमला के चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होंगे। शहरी विकास विभाग की सिफारिश को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने खारिज कर दिया है। सरकार ने शिमला के चुनावों में नगर निगम धर्मशाला के पैट्रन को ही अपनाने का फैसला लिया है। बीते कुछ दिनों से पार्टी सिंबल पर चुनाव होने की चर्चा चली हुई थी।
जिस पर मुख्यमंत्री ने अब विराम लगा दिया है। उधर, पार्टी सिंबल नहीं होने से प्रत्याशियों में अनुशासनहीनता बढ़ने का अंदेशा बन गया है।
नगर निगम शिमला के चुनाव में अगर कांग्रेस पार्टी को अपेक्षित जीत नहीं मिलती है तो इसका असर विधानसभा चुनावों पर भी पड़ पड़ेगा। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने विस्तृत चर्चा करने के बाद पार्टी सिंबल पर चुनाव नहीं पड़ने का फैसला लिया है।
हालांकि कांग्रेस, भाजपा और माकपा तीनों दलों के नेता सार्वजनिक तौर पर पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की पैरवी कर चुके हैं। उधर, पार्टी सिंबल पर चुनाव बेशक नहीं हो रहे हैं लेकिन अंदरखाते राजनीतिक दल ही वार्डों में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की सूची तैयार कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रत्याशियों की घोषणा भी पार्टियों के बैनर तले ही होंगी।
अधिसूचना जारी होने पर बना हुआ है संशय
शिमला। नगर निगम चुनाव की अधिसूचना के जारी होने को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। पांच जून को नगर निगम में नई कार्यकारिणी का गठन किया जाना है। वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल चार जून को पूरा हो रहा है।
निगम चुनाव के लिए कम से कम एक माह का समय दिया जाता है। ऐसे में संभावित है कि एक या दो मई को निगम चुनाव की घोषणा हो सकती है। तीन जून को परिणाम घोषित हो सकते हैं।
महिला आरक्षण को लेकर भी स्पष्ट नहीं स्थिति
शिमला। महिलाओं के लिए वार्ड जनसंख्या के आधार पर तय किए जाने को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। शहरी विकास विभाग इसकी अधिसूचना भी जारी कर चुका है। इसके बावजूद शहर में चर्चा है कि इस मामले को दोबारा कैबिनेट में ले जाकर सरकार महिला
वार्डों का आरक्षण पर्ची से तय करने की तैयारी में है। तर्क दिया जा रहा है कि जनसंख्या से महिला वार्ड तय किए जाने से कांग्रेस के करीब आठ सीटिंग पार्षदों के टिकट कट रहे हैं। ऐसे में इस मामले को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है।