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एमसी दफ्तर चलाने के लिए लिफ्ट पार्किंग खरीदने पर हंगामा, रद्द हुआ प्रस्ताव

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शिमला के बचत भवन में नगर निगम की मासिक बैठक में पार्षदों को शांत करती महापौर सत्या कौंडल। - फोटो : SHIMLA CITY
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एमसी प्रशासन ने लाया था प्रस्ताव, लोगों को एक छत के नीचे दी जानी हैं सुविधाएं
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56 करोड़ में खरीदी जानी थी यह पार्किंग
पार्षदों बोले, यह ठेकेदार को फायदा पहुंचाने वाला प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम कार्यालय के लिए सर्कुलर रोड पर लिफ्ट स्थित मल्टी स्टोरी पार्किंग को 56 करोड़ रुपये में खरीदने के निगम प्रशासन के प्रस्ताव को पार्षदों ने नकार दिया है।
मेयर सत्या कौंडल की अध्यक्षता में वीरवार को हुई नगर निगम की मासिक बैठक के दौरान पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर खूब हंगामा किया। आपत्ति जताई कि यह शहरवासियों को सुविधा देने के लिए नहीं बल्कि एक ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की योजना है। कांग्रेस पार्षद इंद्रजीत सिंह ने कहा कि एक ओर निगम ने टुटीकंडी पार्किंग महज 10 लाख रुपये मासिक किराये पर बेच दी दूसरी ओर निगम की जमीन पर बनी निजी पार्किंग 56 करोड़ में खरीदी जा रही है। यह तो ऐसा है जैसे अपनी नई पैंट दस रुपये में बेच दो और दूसरे की पुरानी फटी पैंट सौ रुपये में खरीद लो। पार्षद सुषमा कुठियाला ने कहा कि आखिर ऐसे प्रस्ताव लाए क्यों जाते हैं। निगम का दफ्तर सब्जी मंडी में ही बनेगा। कांग्रेस पार्षद दिवाकर शर्मा, आनंद कौशल, सिमी नंदा, राकेश चौहान समेत सभी विपक्षी पार्षदों ने इसका विरोध किया। भाजपा पार्षद भी दबी जुबान में इसका विरोध करते नजर आए। प्रस्ताव पर सहमति न बनने के बाद इसे प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
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निगम प्रशासन ने दिया यह तर्क
नगर निगम प्रशासन ने तर्क दिया कि शहरवासियों को निगम की सारी सेवाएं एक छत के नीचे मुहैया करवाने से जुड़ा एक केस प्रदेश हाईकोर्ट में चल रहा है। निगम ने सुनवाई के दौरान सब्जी मंडी में दफ्तर बनाने का विकल्प दिया था। लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि सब्जी मंडी में पार्किंग की सुविधा नहीं है। ऐसे में इस पार्किंग में दफ्तर बनाने का सुझाव दिया। अब इस मामले पर 25 फरवरी को सुनवाई होनी है। पार्षदों ने कहा कि वह इस सुझाव को नहीं मानते। सब्जी मंडी में ही निगम सारी सुविधाएं देगा।
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सदन में गूंजा अवैध भवनों का मामला
सदन में दिवाकर देव शर्मा ने मर्ज एरिया के अवैध भवनों के नियमितीकरण का मामला भी उठाया। निगम प्रशासन ने कहा कि इससे जुड़ा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सदन ने प्रस्ताव पारित कर दोबारा इस मामले को सरकार के पास भेजने का फैसला लिया। पार्षद कमलेश मेहता ने सैहब सोसायटी का मामला उठाया। पूछा कि सैहब की एजीएम क्यों नहीं हो रही। प्रशासन ने बताया कि साल 2017 में इसकी बैठक हुई थी। अब जल्द बैठक बुलाएंगे। पार्षद शैली शर्मा के सवाल पर निगम अब दोबारा सरकार को प्रस्ताव भेजेगा। इसमें पार्षदों को कारपोरेटर बुलाने की मांग की गई।
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