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नगर निगम खाली, सड़कों के गड्ढे भरने के लिए पैसा नहीं

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एमसी ने सरकार से मांगा बजट, पैसा दो तभी दुरुस्त हो पाएंगी सड़कें
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एमसी के अधीन हैं छोटे-बड़े 234 एंबुलेंस रोड
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चुनावी साल में भी राजधानी की खस्ताहाल सड़कों से शहरवासियों को राहत नहीं मिल पाएगी। कंगाली से जूझ रहे नगर निगम ने शहर की सड़कों की टारिंग करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। निगम का खजाना खाली होने से शहर की दो सौ से ज्यादा सड़कों की टारिंग लटक गई है।
नगर निगम ने सरकार को इस बारे में पत्र लिख दिया है। टारिंग के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट जारी करने की मांग की है। नगर निगम का कहना है कि पैसा मिलने पर ही शहर की सड़कों पर पड़े गड्ढे भर पाएंगे। शहर में नगर निगम के छोटे बड़े कुल 234 एंबुलेंस रोड हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 102 किलोमीटर है। ज्यादातर सड़कों पर गड्ढे पड़ चुके हैं। कई जगह खुदाई तो कहीं बरसात में मलबा गिरने के कारण सड़कें खस्ताहाल हैं। इनकी टारिंग के लिए करीब पांच करोड़ चाहिए।
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नगर निगम हर साल मार्च में सड़कों की टारिंग के लिए टेंडर कर देता था ताकि अप्रैल से ही सड़कों की टारिंग शुरू हो जाए। लेकिन इस बार पैसा न होने से टेंडर नहीं किए गए हैं। निगम की सड़क एवं भवन निर्माण शाखा ने इस बारे में पांच करोड़ रुपये का बजट जारी करने की मांग की है। निगम ने इस बारे में सरकार को पत्र भेज दिया है। अब देखना है कि सरकार कब तक पैसा जारी करती है।
कमाई घटी, ग्रांट भी नहीं
मिली, कैसे करवाएं काम
नगर निगम की कमाई बढ़ने की बजाय लगातार घट रही है। पानी का पैसा कंपनी ले रही है। वहीं टैक्स, कूड़ा बिल और किराये आदि का भी नगर निगम पूरा पैसा वसूल नहीं कर पा रहा। टैक्स के तौर पर आठ से दस करोड़ रुपये अटका है तो कूड़े और किराये के भी हजारों डिफाल्टर हैं। दूसरी ओर केंद्र की ओर से मिलने वाली ग्रांट भी बंद है। बीते दो साल से राज्य सरकार भी मर्ज एरिया ग्रांट नहीं दे रही। ऐसे में निगम के पास अब कर्मचारियों की तनख्वाह देने के बाद विकासकार्यों के लिए पैसा नहीं बच रहा।
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सरकार से मांगा है बजट : महापौर
महापौर सत्या कौंडल ने कहा कि शहर में सड़कों की टारिंग के लिए सरकार से बजट मांगा है। शहरी विकास मंत्री के समक्ष यह मामला उठाया है। प्रयास रहेगा कि जल्द बजट मिलने पर टेंडर कॉल कर सड़कों की टारिंग शुरू हो।
आंकड़ों में समझें
कुल 234 एंबुलेंस रोड, लंबाई 102 किलोमीटर
बीते साल करीब आधी सड़कों की हुई टारिंग
टारिंग के लिए चाहिए पांच करोड़
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