ढली में शहरी गरीबों के आशियाना के फोरलेन की जद में आने का मामला स्थानीय पार्षद शैलेंद्र चौहान ने कई बार महापौर, उप महापौर और आयुक्त के समक्ष उठाया। इसके बावजूद किसी के कान में जूं नहीं रेंगी।
अब 62 फ्लैट गिराए जाने हैं। ढली के पार्षद शैलेंद्र चौहान का दावा है कि उन्होंने बीते छह माह में कई बार आशियाना का निर्माण बंद करवाने की मांग की लेकिन, किसी ने नहीं सुनी।
सब कुछ जानते हुए भी केंद्र सरकार से शहरी गरीबों के मकान बनाने के लिए आई धनराशि का दुरुपयोग जारी रहा। जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत ढली वार्ड में शहरी गरीबों के लिए 176 फ्लैट बनाए गए हैं।
फोरलेन के लिए गिराए जाने हैं फ्लैट
फोरलेन बनाने के लिए नेशनल हाइवे अथारिटी ने 62 फ्लैटों को चिह्नित कर दिया है। इन फ्लैटों का गिराया जाना तय है। करोड़ों रुपये इन पर खर्च किए गए हैं।
फोरलेन का सर्वे होने तक अधिकांश निर्माण पूरा हो गया था। करीब छह माह पूर्व जब मालूम पड़ा था कि शहरी गरीबों का आशियाना भी इसकी जद में आ रहा है तो उसी समय नगर निगम को काम बंद करवाना चाहिए था।
मगर निगम प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। सब कुछ जानते हुए भी फ्लैटों को तैयार करने का काम जारी रखा। करोड़ों रुपये बेवजह खर्च कर दिए गए।
अब स्थानीय पार्षद के आरोपों ने निगम की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है।