हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के डोगरी नाले में हिमखंड में दबे निरमंड के शहीद विदेश को सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। शहीद की पत्नी की आंखों में आंसू थे, लेकिन लाल जोड़ा पहनकर उन्होंने विदेश को सलामी देकर अंतिम विदाई दी।
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हर आंख नम थी पर विदेश की शहादत पर सब फख्र पर भी महसूस कर रहे थे। सुबह से ही खरगा पंचायत के थरूआ गांव में विदेश के घर पर भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए थे। करीब साढ़े नौ बजे तिरंगे में लिपटकर विदेश का पार्थिव शरीर घर के आंगन में पहुंचा।
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पति का शव देखकर पत्नी निंटा बेसुध हो गईं। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने किसी तरह निंटा को संभाला। करीब साढ़े दस बजे शहीद विदेश की अंतिम यात्रा शुरू हुई। इससे पहले इनकी पत्नी निंटा ने शादी का लाल जोड़ा पहना और सलामी दी। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंख नम थी।
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अंतिम यात्रा शुरू होते ही ग्रामीणों ने ...विदेश आप अमर रहें... भारत मां की जय... नारे लगाए। घर से लेकर करीब छह किलोमीटर दूर चाटी शमशानघाट तक शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई।
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इसके बाद सेना के जवानों ने विदेश को सलामी दी और प्रशासन की ओर से शहीद को पुष्प अर्पित किए गए। करीब पौने 2 बजे सतलुज नदी के किनारे उनके भतीजे भुवनेश्वर, भाई दिनेश, भाई कमलेश, चाचा सुरेश कुमार और पिता ईश्वर ने मुखाग्नि दी।
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इससे पूर्व शहीद विदेश का शव वीरवार को पूह से सेना के वाहन में झाकड़ी तक पहुंचाया गया। शुक्रवार सुबह झाकड़ी से शहीद का शव उनके पैतृक गांव थरूआ पहुंचाया गया। यहां शहीद के शव को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया।
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शहीद के पिता ईश्वर ठाकुर ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। विदेश की भरपाई करना मुश्किल है। इस दौरान प्रशासन की ओर से एडीएम अक्षय सूद ने शहीद के परिजनों को एक लाख रुपये की राशि राहत के तौर पर दी।
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विदेश का सात साल पहले विवाह हुआ था, लेकिन अभी तक उनकी कोई संतान नहीं है। दादा केशू राम (90) अपने पोते के शहीद होने की खबर से सदमे में हैं।
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विदेश 20 फरवरी को सेना के छह जवानों के साथ हिमंखड में दब गए थे। विदेश के चाचा सुरेश कुमार 7 डोगरा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
बडे़ भाई दिनेश कुमार महार रेजिमेंट 6 बटालियन सियाचिन पर तैनात थे। वहां से एक माह पहले सेवानिवृत्त हुए हैं।
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शहीद विदेश के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देते परिवार के लोग।