जब सैनिक की अंतिम शव यात्रा निकली तो शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव से कुछ दूरी पर शलाड़ा नाला में लाया गया। नाले पर पुल भी नहीं था। नाले पर गिरे पेड़ पर से शव को बड़ी मुश्किल से दूसरी ओर पहुंचाया गया। हालांकि रोजाना ग्रामीणों का यहां से आना-जाना रहता है। शलाड़ा नाला में पुल का न बनना सरकार की नाकामी दर्शाता है। इसके साथ ही तुंग में भी पुल नहीं बना है। इसका एक वर्ष पहले इसका शिलान्यास हो चुका है।
ऐसे हालातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कितना विकास हुआ है। एक जवान के लिए सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब लोगों को नाला पार करने के लिए पुल और सफर के लिए चकाचक सड़क मिले। उधर, लोनिवि बंजार के सहायक अभियंता रोशन लाल ठाकुर ने कहा कि सड़क का कार्य लॉकडाउन के चलते बंद है। तुंग में पुल के लिए ढाई करोड़ स्वीकृत हुआ है। इसके टेंडर हो चुके हैं। शलाड़ा नाला पर पुल का निर्माण पंचायत स्तर पर होगा।