प्रमाण पत्र जारी न करने का कारण बताते हुए सरकार की ओर से प्रार्थी को बताया गया था कि हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले पर सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी अपील लंबित नहीं है।
इधर, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि सरकार ऐसे आरक्षण देते समय लैंगिक आधार पर भेदभाव नहीं कर सकती। सरकार की नीति के अनुसार प्रावधान है कि फ्रीडम फाइटर के वैवाहिक पुरुष वार्ड नौकरियों के लिए 2 फीसदी आरक्षण के लिए पात्र हैं, जबकि यह पात्रता वैवाहिक महिला वार्ड के लिए नहीं है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे भेदभावपूर्ण ठहराते हुए विवाहित महिलाओं को भी उक्त आरक्षण के लिए पात्र माना है। प्रार्थी के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का कोई स्थगन आदेश जारी नहीं हुआ है। मामले पर अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।