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Shimla News: सीटू-किसान सभा के साथ सड़कों पर उतरे कई संगठन, निकाली रैली

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने शहर के पंचायत भवन से चौड़ा मैदान तक निकाली रैली, केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
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सफाई से लेकर अस्पतालों तक के काम प्रभावित
बंद रही तहबाजारी मार्केट, मिड डे मील कार्य प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुधवार को राजधानी में कई संगठन हड़ताल पर रहे। इससे शहर में सफाई, मिड डे मील, आंगनबाड़ी केंद्रों और अस्पतालों तक कई काम ठप रहे। शहर में तहबाजारी मार्केट भी दोपहर बाद तक बंद रही।

शहर में सीटू, हिमाचल किसान सभा के बैनर तले कई संगठनों ने पंचायत भवन से चौड़ा मैदान तक रैली निकाली। इस दौरान रैली में शामिल लोगों ने केंद्र की किसान और मजदूर विरोध नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली में मजदूरों, किसानों के अलावा आंगनबाड़ी, मिड डे मील कार्यकर्ता, मनरेगा, निर्माण, औद्योगिक मजदूर, बीआरओ, आउटसोर्स, ठेका, स्वास्थ्य, निर्माणाधीन पनबिजली परियोजना, सतलुज जल विद्युत निगम, होटल, रेहड़ी फड़ी तहबाजारी, सैहब कर्मचारी, एसटीपी कर्मी, विशाल मेगामार्ट, कालीबाड़ी मंदिर आदि के हजारों मजदूरों और कर्मियों ने हिस्सा लिया। हड़ताल को हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएलयू, पेंशनर एसोसिएशन, दलित शोषण मुक्ति मंच, जन विज्ञान आंदोलन आदि का भी समर्थन रहा। साथ ही सीटू से संबंधित बैंक, बीमा कर्मियों की यूनियन, आईजीएमसी, केएनएच, चमियाना, मानसिक रोगियों के अस्पताल कर्मी भी रैली में पहुंचे। पंचायत भवन से निकाली गई यह रैली विधानसभा चौक होते हुए चौड़ा मैदान तक पहुंची। यहां रैली में शामिल हजारों लोगों को नेताओं ने संबोधित किया।
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लेब कोड के जरिये गुलामी थोप रही मोदी सरकार
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर, बैंक कन्फेडरेशन संयोजक नरेंद्र ठाकुर, एचपीएमआरए नेता हुक्म शर्मा, रमाकांत मिश्रा, विवेक कश्यप ने कहा कि मोदी सरकार मजदूर विरोधी चार लेबर कोड के जरिये मजदूरों पर गुलामी थोप रही है। इससे 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। कहा कि 26 हजार न्यूनतम वेतन करने, योजना कर्मियों, आउटसोर्स, ठेका प्रथा, मल्टी टास्क, टेंपररी, कैजुअल, ट्रेनी की जगह नियमित रोजगार देने, मनरेगा बजट में बढ़ोतरी, मनरेगा मजदूरों हेतु न्यूनतम वेतन लागू करने, श्रमिक कल्याण बोर्ड के आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने, किसानों को कर्जा मुक्त करें और न्यूनतम समर्थन मूल्य दें। इसके साथ वक्ताओं ने स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू करने, किसानों की आत्म हत्याओं पर रोक लगाने, जमीनों और घरों से जनता की बेदखली रोकने, फोरलेन प्रभावितों को उचित मुआवजा देने, 80 प्रतिशत रोजगार देने आदि की मांगों पर प्रदेश के हजारों मजदूर और किसान सड़कों पर उतरे थे। रैली में सैहब, मिड डे मील, आउटसोर्स, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं की न्यूनतम वेतनमान समेत कई मांगों को उठाया गया। हड़ताल के समर्थन में जिला और विकास खंड स्तर पर भी कई जगह प्रदर्शन हुए।
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