दूसरा पड़ाव केलिंग मंदिर और तीसरा डड़ी अल्यास के बाद चौथे दिन मणिमहेश झील पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं और ट्रैकरों को खाने-पीने और रहने का सामान साथ ले जाना पड़ता है। जोवरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोमदेव योकी ने बताया कि यह रूट जून से सितंबर तक खुला रहता है।
यह ट्रैक काफी मुश्किलों भरा है। यहां से यात्रा पर जाने वालों में महिलाएं भी शामिल होती हैं। श्रद्धालुओं और ट्रैकरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की अस्थायी सुरक्षा चौकी स्थापित होनी चाहिए। लाहौल-स्पीति जिप के चेयरमैन रमेश रूअलवा ने कहा कि वह पुलिस प्रशासन और सरकार से इसकी सिफारिश करेंगे।
बता दें कि, 18 अगस्त को पोरी मेले के समापन पर त्रिलोकीनाथ से सैकड़ों श्रद्धालुओं का जत्था भगवान भोलेनाथ से आशीर्वाद लेकर मणिमहेश डल झील की ओर रवाना होगा। इस जत्थे के बाद श्रद्धालु लाहौल की ओर से मणिमहेश जाना बंद कर देंगे। सितंबर से मौसम के करवट लेते ही बर्फबारी का दौर शुरू हो जाता है।