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ग्लेशियरों के बीच 60 किमी सफर कर महादेव के दर्शन करने निकले शिव भक्त

Thu, 01 Aug 2019 10:31 AM IST
अरविन्द ठाकुर दिनेश जस्पा, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
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- फोटो : अमर उजाला
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ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और ग्लेशियरों के बीच होते हुए श्रद्धालुओं का मणिमहेश यात्रा पर जाना शुरू हो गया है। खतरनाक और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर लाहौल-स्पीति के 16,800 फीट की ऊंचाई वाले कुगती पास से मणिमहेश यात्रा शुरू हो गई है। इस खतरनाक रास्ते से यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और ट्रैकरों के लिए सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

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लाहौल छोर से जोवरंग पंचायत के गांव रापे से होते हुए कुगती जोत के रास्ते मणिमहेश के जयघोष लग रहे हैं। करीब 60 किलोमीटर लंबे इस रूट में श्रद्धालु तीन पड़ाव के बाद चौथे दिन लाहौल से मणिमहेश पहुंचते हैं। इसी रास्ते से सात बार डल झील में डुबकी लगा चुके जोवरंग गांव के नोरबू राम नंबरदार ने बताया कि श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव खोलडू पदर या अल्यास में होता है।

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दूसरा पड़ाव केलिंग मंदिर और तीसरा डड़ी अल्यास के बाद चौथे दिन मणिमहेश झील पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं और ट्रैकरों को खाने-पीने और रहने का सामान साथ ले जाना पड़ता है। जोवरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोमदेव योकी ने बताया कि यह रूट जून से सितंबर तक खुला रहता है।

यह ट्रैक काफी मुश्किलों भरा है। यहां से यात्रा पर जाने वालों में महिलाएं भी शामिल होती हैं। श्रद्धालुओं और ट्रैकरों की सुरक्षा के लिए पुलिस की अस्थायी सुरक्षा चौकी स्थापित होनी चाहिए। लाहौल-स्पीति जिप के चेयरमैन रमेश रूअलवा ने कहा कि वह पुलिस प्रशासन और सरकार से इसकी सिफारिश करेंगे। 

बता दें कि, 18 अगस्त को पोरी मेले के समापन पर त्रिलोकीनाथ से सैकड़ों श्रद्धालुओं का जत्था भगवान भोलेनाथ से आशीर्वाद लेकर मणिमहेश डल झील की ओर रवाना होगा। इस जत्थे के बाद श्रद्धालु लाहौल की ओर से मणिमहेश जाना बंद कर देंगे। सितंबर से मौसम के करवट लेते ही बर्फबारी का दौर शुरू हो जाता है।
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