हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अब फर्जी सर्टिफिकेट से डाक विभाग में नौकरी पाने का मामला उजागर हुआ है। मंडी जिले के सरकाघाट के रहने वाले आरोपी मनीष कुमार पुत्र सोहन लाल ने झारखंड अकादमिक काउंसिल शिक्षण संस्थान ज्ञानदीप कैंपस के नाम से दसवीं का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। 600 में 573 अंकों वाली मार्क्सशीट भी तैयार कर ली। इसी मार्क्सशीट से मेरिट के आधार पर उसने घणाहट्टी स्थित देवनगर शाखा में ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी हासिल कर ली।विभाग ने जब दस्तावेज सत्यता जांच के लिए झारखंड के शिक्षण संस्थान को भेजे तो वहां मनीष का सर्टिफिकेट पंजीकृत ही नहीं था। मामला सामने आने के बाद डाक विभाग ने तत्काल प्रभाव से युवक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
मंगलवार को शिमला डाक मंडल के अधीक्षक ने इसकी शिकायत सदर पुलिस थाना में भी कर दी। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। आरोपी दो माह तक नौकरी करता रहा। एएसपी सुनील नेगी ने बताया कि डाक विभाग ने शिमला मंडल के तहत घणाहट्टी स्थित देवनगर शाखा में ग्रामीण डाक सेवक के चयन के लिए 157 उम्मीदवार आमंत्रित किए थे। मनीष का चयन योग्यता के आधार पर हो गया था। उसने 9 सिंतबर, 2022 को अस्थायी तौर पर कार्यभार ग्रहण किया। इससे पहले विभाग ने प्रमाण पत्र सत्यता जांचने के लिए शिक्षण संस्थान को भेजे थे, जो जांच में फर्जी पाए गए। इसके बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
आरोपी को पद से बर्खास्त करने के बाद इस पद को भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में अधिसूचित किया जाएगा। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन के आधार पर निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
विकास नेगी, प्रवर अधीक्षक, शिमला डाक मंडल