देवी-देवताओं की विदाई के साथ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का समापन हो गया। तीसरी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली। जलेब में देव माधोराय की पालकी के साथ एक दर्जन से अधिक देवरथ चले।
जलेब में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी शिरकत की। अंतिम जलेब को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी रही। शिवरात्रि के देव समागम में करीब 190 पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे। शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर चौहाटा की जातर के बाद दोपहर ढाई बजे जलेब शुरू हुई। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राजदेवता माधोराय और आराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जलेब धूमधाम से चौहाटा, मोती बाजार, समेखतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार होते हुए पड्डल ग्राउंड पहुंची। सबसे आगे पुलिस घुड़सवारी, बैंड, पुलिस कर्मी, महिला पुलिस मार्च पास करते हुए चल रहे थे। देवता छाजणू और छमांहू जलेब में सबसे आगे रहे।
कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, देव चपलांदू नाग, सराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राज देवता माधोराय की पालकी, शुकदेव थट्टा आदि देवता जलेब में साथ चले।
देव रथों के साथ ढाले-नगाड़े, शहनाई, रणसिंगों की धुनों पर देवलुओं ने नाचते गाते जलेब की शोभा बढ़ाई। जलेब के पड्डल मैदान पहुंचने के बाद राज्यपाल ने महोत्सव का विधिवत समापन किया।
इस दौरान पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक जयराम, पूर्व मंत्री एवं विधायक महेंद्र सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष चंपा ठाकुर, शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त संदीप कदम, एडीसी ऋग्वेद ठाकुर, एडीएम विवेक चंदेल और सर्व देवता कमेटी के प्रधान शिवपाल शर्मा आदि मौजूद रहे।