जेल रोड मस्जिद विवाद मामले में शुक्रवार को मंडी में हिंदू संगठन सड़क पर उतर आए। पहले लोग सेरी मंच पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे और बाद में वहां से चौहाटा, भगवान मोहल्ला और गांधी चौक होते हुए जेल रोड की तरफ चले। मस्जिद से 200 मीटर पीछे सकोड़ी चौक पर बैरिकेड्स देख प्रदर्शनकारी भड़क उठे और करीब 2:30 घंटे जमकर उग्र प्रदर्शन किया। जब कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स को लांघने की कोशिश करने लगे तो पुलिस ने रोकने के लिए पानी की बौछारें छोड़ दीं। पानी की बौछारों से भगदड़ मच गई और कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। एक युवती को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रदर्शन के चलते पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील रहा। बड़ी संख्या में शहर में पुलिस और क्यूआरटी के जवान चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहे। मस्जिद एरिया वाली सड़क दोनों तरफ से बैरिकेड्स लगाकर पुलिस ने बंद रखी। आयुक्त कोर्ट का फैसला आने से पहले हिंदू संगठन सेरी मंच पर इकट्ठा हुए और हनुमान चालीसा पढ़ने के बाद शहर में रोष रैली निकाली।
शुक्रवार सुबह 10 बजे कुछ लोग की सेरी मंच पर आए थे, लेकिन 11:30 बजे तक यहां सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। करीब 12:30 बजे तक डेढ़ हजार के करीब लोग स्कूल बाजार से होते हुए जेल रोड पहुंचे। बड़ी संख्या में उमड़ी हिंदू संगठनों की भीड़ ने यहां जमकर नारेबाजी और प्रशासन से अवैध निर्माण को गिराने की मांग रखी। करीब 2:30 घंटे चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस जवानों को प्रदर्शनकारियों को रोकने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। इस दौरान धक्का-मुक्की भी होती रही। बिगड़ते हालात को देख पानी की बौछारें छोड़ीं। करीब डेढ़ बजे बेकाबू होते हालात को देख उपायुक्त अपूर्व देवगन और पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों की मांगें सुनीं। उपायुक्त ने प्रदर्शनकारियों को आयुक्त कोर्ट का फैसला बताया और कहा कि कानून के अनुसार मामले को लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन ने कुछ घंटों तक जिंदगी की रफ्तार रोक दी। जेल रोड आठ घंटे यानी बंद रहा। मंडी-धर्मपुर वाया कोटली मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया और इस तरफ बसें नहीं चलने से इस तरफ से आने जाने वाले हजारों लोगों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को तीन बजे तक कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बस सुविधा न मिलने से लोगों को पैदल सफर करना पड़ा।
उधर, रोष रैली के बाद प्रदर्शनकारी गोपाल कपूर ने बताया कि प्रशासन ने उनकी मांगों को पूरा कर लिया है। वहीं, बीआर कौंडल ने बताया कि काूनन के मुताबिक एक महीने के अंदर अवैध निर्माण को तोड़ने का फैसला सम्मानजनक है। अगर प्रशासन कानून के अनुसार काम नहीं करेगा तो अगली बार भीड़ हिंसक भी हो जाएगी और पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।