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मंडी महाशिवरात्रि: संतान सुख देते हैं गण जौहरी देवता, मार्कंडेय ऋषि का नाम भजने से भागतीं हैं बुरी आत्माएं

Tue, 21 Feb 2023 07:23 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

महाशिवरात्रि मेले के लिए पधारे 188 देवी-देवता मंडी के पड्डल मैदान में भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हुए हैं। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए मंगलवार को भी हजारों श्रद्धालुओं ने पड्डल मैदान पहुंचकर शीश नवाया। 
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गण जौहरी देवता, मार्कंडेय ऋषि। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के लिए पधारे 188 देवी-देवता मंडी के पड्डल मैदान में भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हुए हैं। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए मंगलवार को भी हजारों श्रद्धालुओं ने पड्डल मैदान पहुंचकर शीश नवाया। देवी-देवताओं ने भी उन्हें दर्शन दिए और उनके कष्टों का भी निवारण किया।

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श्री देव गण जौहरी भक्तों की मनोकामना को पूरी करते हैं। देवता द्रंग क्षेत्र के मठा न्यूल से हर साल शिवरात्रि में मंडी आते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि देव गण जौहरी संतान सुख देने वाले हैं। जो भी उनसे संतान की इच्छा करता है उसकी इच्छा को वे पूरा करते है। गण जौहरी 18 साल से आ रहे हैं। कटवाल महिपाल ने बताया कि उनका अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है। उन्होंने प्रशासन और सर्व देवता कमेटी से उन्हें पंजीकृत करने की मांग की है।

देश विदेश में भी भ्रमण करती हैं नवदुर्गा
बल्ह क्षेत्र की भगवती श्री नवदुर्गा महाकाल उग्रतारा नैणतुंगा देश और विदेशों में भी भ्रमण कर भक्तों के दुखों का निवारण करती हैं। मान्यता है कि वे पशुओं की बीमारियों से मुक्त करती हैं। इनके दर पर दूर-दूर से भक्त आते हैं। पुजारी मनोहर लाल ने बताया कि वे मेले में सदियों से आ रहे हैं और हमेशा हजारों भक्त माता के दर्शनों के लिए आते हैं।
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मार्कंडेय ऋषि का नाम भजने से भागतीं हैं बुरी आत्माएं
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की शोभा बढ़ा रहे देव मार्कंडेय ऋषि खमराधा औट बलिंढीगढ़ स्नोरघाटी का स्मरण करने से ही बुरी आत्माएं भाग जाती हैं। मान्यता है कि उनसे सच्चे मन से मांगी हर दुआ पूरी होती है। महाशिवरात्रि महोत्सव में मार्कंडेय ऋषि का अहम स्थान है। वे रियासतकाल से मेले में शिरकत कर रहे हैं। हालांकि 1947 के बाद कई कारणों से देवता का मेले में नहीं आया। उनको इस दौरान भी हमेशा आमंत्रित किया जाता रहा है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान 73 वर्ष बाद देवता देवलुओं और कारदारों के साथ मेले में शरीक हुए। देवता के मेला में आने पर उनके दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े रहते हैं।
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रियासतकाल में देवता का ठहराव राजमहल स्थित राज बेहड़े में अन्य देवी-देवताओं के साथ होता था। अब देवता खलियार स्थित माता नैणा देवी मंदिर के पास अपने यजमान के घर देवलुओं के साथ रात्रि ठहराव करते हैं। देवता के कारदार भगतराम और गूर लुदर दत्त ने बताया कि देव मार्कंडेय शिव भगवान के अनन्य भक्त रहे हैं। अल्पआयु के चलते उनके माता-पिता बहुत दु:खी थे। बालक मार्कंडेय भी अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए अल्पआयु में ही भगवान शंकर की तपस्या की। इस दौरान यमराज ने उन्हें ले जाने का प्रयत्न किया मगर शिव ने उनकी रक्षा की और प्रसन्न होकर सातकल्प (सात जन्मों तक जीवित रहना) रहने का वरदान किया। कारदार भगत राम ने बताया कि मार्कंडेय ऋषि का स्नोरघाटी के खमराधा में भव्य मंदिर है।
 

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