फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी हादसाः सरकार की रिपोर्ट पर सख्त हुआ हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
मंडी के लारजी हादसे पर हिमाचल सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट ने असंतोष जताते हुए कड़ा रुख अपना लिया है। सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के सामने राज्य सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट रखी।
विज्ञापन


इस पर नाखुशी जताते हुए खंडपीठ ने 19 जून को दोबारा इस केस की सुनवाई तय की और सरकार से नए सिरे से रिपोर्ट देने को कहा। हाईकोर्ट ने अमर उजाला की खबर पर इस केस में स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव के मार्फत राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

जिस मीडिया रिपोर्ट के आधार पर ये नोटिस जारी हुआ, उसमें आरोप था कि लारजी बिजली परियोजना से बिना सूचना पानी छोड़ने के कारण हैदराबाद के 24 छात्र ब्यास नदी में बहे।
विज्ञापन

सरकार से 19 जून से पहले मांगा जवाब

राज्य सरकार को 16 जून को जवाब दायर करने को कहा गया था। इस रिपोर्ट से नाखुशी जताने के बाद अदालत ने मंडलायुक्त मंडी ओंकार शर्मा को आदेश दिए हैं कि वह इस मामले की जांच रिपोर्ट 19 जून से पहले सीधे अदालत के सामने पेश करें।

उन्हें 19 जून को अदालत में मौजूद रहने को भी कहा गया है। राज्य सरकार ने मंडलायुक्त को इस जांच के लिए 15 दिन का समय दिया था।

कोर्ट ने साथ ही विज्ञान ज्योति इंजीनियरिंग कॉलेज हैदराबाद, प्रबंध निदेशक बिजली बोर्ड, एसई और रेजिडेंट इंजीनियर लारजी पॉवर हाउस थलौट को भी आगामी 19 जून को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं।

सरकार ने माना, न वार्निंग सिस्टम था, न साइन बोर्ड

हिमाचल सरकार की ओर से दायर स्टेटस रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि हादसे के बाद डीसी मंडी ने मौके का मुआयना किया। उन्होंने पाया कि दुर्घटना के स्थान पर कोई वार्निंग सिस्टम नहीं लगाया गया था और न ही कोई साइन बोर्ड।

हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया है कि किसकी गलती से ये हादसा हुआ। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि लारजी डैम का लेवल 969.50 मीटर पर पहुंच जाने के कारण गेट को सिर्फ 5 से 50 सेंटीमीटर खोलकर पानी छोड़ा गया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस दुर्घटना के तुरंत बाद बचाव और राहत कार्य शुरू किया गया और एसडीएम, एडीएम, एसपी और डीएसपी एसपी मौके पर पहुंचे। शवों को उनके घर पहुंचाया गया और परिजनों के ठहरने की पूरी व्यवस्था की गई है।

विद्युत बोर्ड ने पूरी की आंतरिक जांच

उधर, प्रदेश बिजली बोर्ड की ओर से गठित चार सदस्यीय कमेटी ने आंतरिक जांच पूरी कर ली है। कमेटी ने ई-मेल के जरिये प्रबंध निदेशक पीसी नेगी को अपनी रिपोर्ट सुबह ही भेज दी थी, लेकिन नेगी ने रिपोर्ट को बाई हैंड बोर्ड मुख्यालय मंगाया है। उन्होंने कहा कि रात तक रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। इसके बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा।

बिजली बोर्ड प्रबंधन अब इस रिपोर्ट के आधार पर लारजी हादसे के आरोपी दो अफसरों और एक कर्मचारी का भविष्य तय करेगा। बोर्ड ने जांच कमेटी को एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। जांच कमेटी ने घटनास्थल का दौरा कर वहां चश्मदीद लोगों के बयान लिए।

वहीं, इस मामले में निलंबित अधिशासी अभियंता मनदीप सिंह (उत्पादन), अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ढटवालिया (सिविल) तथा फिटर हरबंस से पूछताछ कर आठ जून को बिजली उत्पादन और बांध से छोड़े गए पानी का रिकार्ड खंगाला था।
विज्ञापन

आधुनिक उपकरण फेल, नहीं लग रहा सुराग

9 दिन पहले ब्यास नदी में बहे हैदराबाद के इंजीनियरिंग छात्रों को तलाशने में अत्याधुनिक सोनार और स्ट्रीट मैपर जैसे उपकरण भी फेल हो गए हैं। मल्टी वीम सोनार व स्ट्रीट मैपर से दो दिन तक पंडोह डैम को खंगालने के बाद भी बहे छात्रों का कोई पता नहीं चल पाया है। विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि अत्याधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल के बावजूद कुछ हासिल नहीं हुआ। सोमवार को भी पंडोह डैम में इन उपकरणों से सर्च ऑपरेशन जारी रहा, लेकिन कोई शव नहीं मिल पाया।

पंडोह डैम खंगालने के साथ बहे छात्रों की कांगड़ा के पौंग बांध में भी तलाश शुरू कर दी है। सोमवार को यहां भी सर्च अभियान चलाया गया। हादसे के नौंवे दिन सोमवार को सुबह से मल्टी वीम सोनार और स्ट्रीट मैपर से पंडोह डैम में शवों को ढूंढा गया। ब्यास में बहे 16 छात्र और एक टूर लीडर अभी भी लापता हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें