गुरुवार को भी मनाली से लेह के लिए सेना से भरी एक निजी बस रवाना हुई। लद्दाख और अरुणाचल में बतौर डीआईजी रहे रक्षा विशेषज्ञ अनूप राम ठाकुर ने बताया कि 1962 के बाद सीमा सड़क संगठन द्वारा मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया गया है। उसके बाद यह मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कहा कि सीमा सड़क संगठन द्वारा इस मार्ग को डबललेन किया जा रहा है।
सुरक्षा की दृष्टि से यह मार्ग अति महत्वपूर्ण है और 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ रसद को सीमा के लिए भेजा गया था। मनाली-लेह मार्ग में रोहतांग के नीचे सितंबर में बनकर तैयार होने वाली अटल टनल (रोहतांग) से आवाजाही से सेना को सीमा तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे 46 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी और बडे़ वाहन चार घंटे के बजाए मात्र 45 मिनट में कोकसर पहुंचने लगेंगे। वहीं सेना के वाहन एक दिन में ही लेह पहुंच जाएंगे।