राज्य के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि दिसंबर और जनवरी में सेब बगीचों में तौलिये बनाने का काम पूरा कर सकते हैं। तौलिये पेड़ से तीन फुट की दूरी पर बनाए जाएं।
इससे पेड़ों की जड़ों को नुकसान होेने से बचा सकते हैं। बगीचों में पूरी नमी उत्पन्न होने के बाद खाद डालने का काम करें। बगीचों में नमी नहीं है तो खाद न डालें। ऐसे समय में खाद डालना पौधों के लिए घातक होता है।
बारिश और बर्फबारी होने के तुरंत बाद भी बगीचों में खाद न डालें। बगीचों में प्रति पेड़ 2 किलो सुपर फास्फेट या चालीस किलो गोबर की गली सड़ी खाद उपयोग में लाएं। देसी खाद लंबे समय तक बगीचों में नमी बनाने में सहायक रहती है।