हिमाचल के विद्युत घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर बैठक में सहमति बनी। यह निर्णय स्वच्छ और निर्मल यमुना की दिशा में एक अहम पड़ाव सिद्ध होगा, जिससे यमुना में शुद्ध जल का प्रवाह बढ़ेगा। प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस बैठक में निर्णय किया गया कि किशाऊ बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90 फीसदी केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार की ओर से और शेष 10 प्रतिशत राशि का वित्तीय भार 6 राज्यों की ओर से वहन किया जाएगा।
उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे प्रदेश के हितों की रक्षा में एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति दी थी। वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल को प्रति वर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे राज्य को सालाना लगभग 600 करोड़ रुपये की आय होगी। इस बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, प्रोजेक्ट से लाभान्वित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे।
किशाऊ बांध परियोजना पर 2021-22 में हिमाचल और उत्तराखंड के बीच एक समझौता हुआ था। इसमें बिजली उत्पादन की लागत 2 रुपये 30 पैसे प्रति यूनिट तय की गई थी। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने इसे मानने से इन्कार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्थापन का सर्वाधिक प्रभाव हिमाचल पर पड़ेगा, इसलिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ न्यायसंगत नहीं था। उनके अनुसार प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी की गई। वर्तमान सरकार ने सदैव प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोपरि रखा है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने एक सवाल पर कहा कि एंट्री टैक्स मेरे समय में नहीं लगा है। यह 20 साल से चल रहा है। थोड़ा बहुत ही बढ़ा है। पंजाब में हमारे भाई-बंधु हैं। इसे लेकर वहां मुख्यमंत्री से भी बात की है।