उन्होंने कहा कि दरबारी होने की प्रथा तो कांग्रेस पार्टी की है जहां पार्टी का हर नेता चाटुकारिता करके उच्च पद प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के सभी क्षेत्रों की संस्कृति, सभ्यता और भाषाओं का सम्मान करती है, मगर भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता
जानता है कि मर्यादित भाषा क्या होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक दल के नेता भी असमंजस में हैं कि वे किस गुट के जाएं। इसी कशमकश में वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
ठाकुर, परमार और कंवर ने मुकेश अग्निहोत्री को सुझाव दिया कि वे पहले अपना बिखरता हुआ कुनबा संभाले और फिर प्रदेशवासियों की ओर से भारी बहुमत से निर्वाचित सरकार पर टिप्पणी करें।