इस प्रोजेक्ट के तहत पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में वर्ष 2016 और 2017 में इटली से सेब के पौधे तत्कालीन मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री की अनुमति के बाद खरीदे गए, लेकिन जयराम सरकार के गठन के बाद अधिकारी ने मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री की अनुमति लेना जरूरी नहीं समझा।
अनुमति के बिना इटली से सेब के 3 लाख 76 हजार 500 पौधों को आयात किया गया। इटली से मंगवाए गए इन पौधों को नौणी, बाथल, गोड़ा, बजौरा आदि स्थानों पर रखा गया है। हैरानी की बात यह है कि गत तीन माह से आयात करने के बाद 20 से 25 हजार पौधे बद्दी कोल्ड स्टोर में पड़े हैं।
इन्हें अभी तक कहीं पर रोपा नहीं किया है। इससे इन पौधों के सूखने की भी आशंका है। प्रोजेक्ट में कंसल्टेंसी पर 91 करोड़ 86 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
बागवानी विभाग के पास प्रदेश में प्रजनन उद्यान हैं। प्रजनन उद्यानों की सैकड़ों बीघा भूमि बेकार पड़ी है। विभाग अब अपनी भूमि पर सेब के रूट स्टॉक तैयार करेगा, ताकि भविष्य में इसे विदेशों से न मंगवाना पड़े।