हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षेत्र में लोग अब बारात में 60 से अधिक बाराती नहीं ले जा पाएंगे। इसके साथ ही ग्यारह से अधिक गाडि़यां ले जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। यह फैसला गिरी पार क्षेत्र में हुई महापंचायत में लिया गया है।
यही नहीं दहेज प्रथा के लेन-देन पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। क्षेत्र में पुराने और खर्चीले रीति रिवाजों को देखते हुए गिरिपार ब्राह्मण कल्याण समिति ने एक सम्मेलन आयोजित कर सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है। प्रतिबंध समूचे गिरिपार क्षेत्र में रहेगा।
सम्मेलन में 118 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इन फैसलों पर हामी भर दी है। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया कि पारित नियमों के विरुद्ध अगर कोई पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ग्वाली पंचायत के भंगाठा में हुई महापंचायत
ग्वाली पंचायत के भंगाठा गांव में शनिवार शाम को आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता दुगाना निवासी सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी संतराम शर्मा ने की। इस अवसर पर खर्चीले रीति रिवाजों को बंद करने पर फैसला लिया गया।
साथ ही ओबीसी प्रकोष्ठ का गठन कर 15 सदस्यीय टीम बनाई गई। प्रकोष्ठ लोगों को आ रही दिक्कतों का निदान करेगा। सर्वसम्मति से खदराई आत्मा शर्मा प्रधान, लाखी राम शर्मा महासचिव, रघुवीर शर्मा उपाध्यक्ष, तोता राम शर्मा कोषाध्यक्ष तथा रमेश पहाडि़या को प्रेस सचिव चुना गया।
‘मामा धाम’ और ‘पोरशा’ प्रथा हो चुकी है बंद
सिरमौर जिले के चार विधानसभा क्षेत्र की 124 पंचायतों को ट्रांसगिरि क्षेत्र कहा जाता है। इसमें शादी के अलावा अंतिम संस्कार के दौरान कई ऐसे पुराने और खर्चीले रिवाज हैं जिससे गरीब आदमी का दीवाला निकल जाता है।
लोग और सामाजिक संगठन इन रीति रिवाजों को बदलने में आगे आ रहे हैं। ‘मामा की धाम’ और ‘पोरशा’ प्रथा पर पहले ही कई गांवों ने प्रतिबंध लगा दिया है। हाटी समाज भी इन पुराने रिवाजों को मिटाने के लिए आंदोलन छेड़े हुआ है।
जिला हाटी कल्याण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जीएस चौहान ने कहा कि गिरिपार बाहृमण समिति ने बैठक में जो निर्णय लिए हैं, वह स्वागत योग्य हैं।
इससे फिजूलखर्ची पर रोक लगेगी। देहज प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध और भी प्रशंसनीय कदम हैं। अब गिरिपार के प्रत्येक घर में शौचालय की मुहिम को भी इसी प्रकार सबको मिलकर आगे बढ़ाना होगा।