महाभारत काल की युद्ध शैली को सोलन, सिरमौर समेत शिमला के दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। सोलन में मां शूलिनी मेले के दौरान शनिवार को इस नृत्य का ठोडो मैदान में प्रदर्शन किया गया। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ियों ने न सिर्फ विरोधी आक्रमण को झेला बल्कि धनुष और बाण से उसका जवाब भी दिया। ठोडा नृत्य के इस युद्ध में थककर बाहर होने वाले को पराजित माना जाता है। हालांकि इस बार ठोडा नृत्य की प्रतियोगिता नहीं करवाई गई। सिर्फ शगुन के तौर पर खेल को चार टीमों के बीच खेला गया। इनमें ठोडा दल पीरन से चुन्नीलाल, चौपाल से धनीराम, सिरमौर से नेत्र नेगी, डिब्बर ढरोल से लक्ष्मी सिंह की टीम ने भाग लिया। इस मौके पर प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य तरसेम भारती ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
जानकारी के अनुसार जैसे ही खिलाड़ी मैदान में पहुंचे तो ठोडो नृत्य और खेल में रुचि रखने वाले लोगों की भीड़ मैदान में जुट गई। घुटने से नीचे तीर मारने का खेल खेला गया। ठोडो नृत्य के अध्यक्ष नेत्र सिंह ने बताया कि तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है। खेल में पैर पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है। इस दौरान मैदान में खिलाड़ियों में ठोडा खेलने के लिए काफी उत्साह रहा। पूरा दिन ठोडा खेल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस मौके पर ठोडा नृत्य के सचिव चंद्रकात, कोषाध्यक्ष कांति स्वरूप और प्रेस सचिव मुकेश गुप्ता मौजूद रहे।