बारिश, ओलावृष्टि और असमय बर्फबारी से फ्लावरिंग को नुकसान हुआ। गर्मियों में फ्लावरिंग के दौरान जब तापमान औसत 15 डिग्री जरूरी था तो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 8 डिग्री से भी नीचे लुढ़क गया। ठंड से पॉलिनेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। अप्रैल, मई में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ। अच्छे रंग और आकार के लिए जब धूप जरूरी थी तब प्री-मानसून की बारिश से नुकसान हुआ। उत्पादन गिरने का कारण जलवायु परिवर्तन भी माना जा रहा है, जिससे निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।
हालांकि, किन्नौर में करीब 4 लाख पेटी सेब अभी मंडी में पहुंचना बाकी है। इस सीजन में अदाणी को भारी नुकसान का अंदेशा है। फसल कम और गुणवत्ता सही न होने से रामपुर, सैंज और रोहड़ू स्थित सीए स्टोर क्षमता के अनुसार पूरे नहीं भर पाए। अदाणी ने पहली बार पराला,पंचकूला और लाफूघाटी मंडी से भी सेब खरीद की। इस साल अदाणी ने अधिकतम 110 रुपये किलो तक सेब खरीद की और क्वालिटी कंट्रोल भी नहीं रखा। फिलहाल जो सेब कंपनी के सीए स्टोर में है वह मार्च के बाद बाहर निकलेगा।
फसल कम पर बागवानों को मिले रिकॉर्ड दाम : नेगी
उधर, इस बारे में बागवानी एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि इस साल भले ही फसल कम रही लेकिन किलो के हिसाब से बिक्री की व्यवस्था शुरू होने से बागवानों को उपज के रिकॉर्ड दाम मिले। मंडियों में सेब के औसत दाम 140 से 160 रुपये किलो तक मिले। मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित हुआ। अब तक करीब 1.78 लाख पेटी सेब का विपणन हो चुका है।