प्रदेश सकार को घटिया रोड़ी-रेत की शिकायत मिली है। विकास कार्यों के निर्माण के लिए मिट्टी मिक्स रोड़ी आ रही है। इसके इस्तेमाल से लेंटर में दरारें पड़ रही हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार अब सभी क्रशरों की जांच कराएगी। क्रशर मालिकों को निर्देश हैं कि 40, 20 और 10 एमएम रोड़ी-रेत और जीरा के लिए अलग-अलग जालियां होना अनिवार्य है।
जांच के दौरान कोताही पर अब क्रशर मालिक नप सकते हैं। क्वालिटी कंट्रोल सेल के प्रभारी एवं प्रधान सचिव मुख्यमंत्री संजय कुंडू ने बताया कि गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। सभी क्रशरों की जांच होगी। विकास कार्यों में अच्छी क्वालिटी की सामग्री इस्तेमाल होगी। हिमाचल के हर जिले में हो रहे विकास कार्यों की जांच-पड़ताल की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि क्रशर में तीन तरह की रोड़ी का साइज निकाला जाता है। 40 एमएम की रोड़ी को कंक्रीट के डंगे में इस्तेमाल किया जाता है। 20 एमएम साइज की रोड़ी को लेंटर और सड़क के बीएम पर इस्तेमाल करते हैं। जीरा को टारिंग में इस्तेमाल किया जाता है। सरकार को शिकायत मिली है कि क्रशर मालिक जालियां नहीं लगा रहे हैं, जिससे रोड़ी और जीरा का साइज छोटा-बड़ा आ रहा है।
दूसरे, क्रशर में रेत के साथ अधिकांश मात्रा में मिट्टी पाई जा रही है। कई क्रशर मालिकों ने पहाड़ियों में जेसीबी लगाई है। जेसीबी से मिट्टी और पत्थर दोनों एक साथ क्रशर में डाला जा रहा है। इससे बारीक पत्थर के साथ मिट्टी भी मिक्स हो रही है। इसको इस्तेमाल किए जाने से सड़कों के किनारे लगे डंगे धस रहे हैं।