छोटों को आशीर्वाद देने के लिए उनके सिर पर गुलाल डालेंगे। बराबर उम्र के लोग ही एक दूसरे के गाल पर गुलाल लगाएंगे। इस दौरान वैरागी समुदाय के लोगों की ओर से गाए जाने वाले गीत ब्रज भाषा में ही होते हैं। गोपाल कृष्ण महंत, विनोद महंत ने कहा कि इस दौरान ...हरो रे भोले नाथ दिंगबर, अब तो कष्ट हरो, ...मैं न लड़ी थी शाम निकस गया, ... मैं कैसे होरी से खेलूं सांवरिया जी के संग, रंग में,...शिवों के संग भोले नाथों के संग होरी खेलन में जांऊ आदि ब्रज भाषा में कई गीत गाए जाते हैं।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि वसंत के साथ फूलों का खिलना शुरू हो जाता है। कुल्लू जिले में होली का आगाज भी हो जाता है। उन्होंने बताया कि होली तक महंत समुदाय के लोग टोलियों में जाकर होली का गायन करेंगी।