पौने पांच साल बीतने के बाद आखिरकार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के पहले लोकायुक्त की तैनाती कर दी, लेकिन हिमाचल में अभी भी लोकायुक्त की तैनाती का इंतजार जारी है। पिछली वीरभद्र सरकार के दौरान खाली हुए लोकायुक्त के पद को वर्तमान जयराम सरकार अब तक नहीं भर सकी है।
यह हाल तब है, जब प्रदेश सरकार बनने से पहले चुनावों के दौरान अपने स्वर्णिम दृष्टिपत्र में भाजपा ने सरकार बनते ही लोकायुक्त की नियुक्ति करने का वायदा किया था। सरकार गठन के एक साल बाद भी पद खाली है। हाल यह है कि पद भरने के लिए अब तक सरकार ने प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है।
पिछली वीरभद्र सरकार ने लोकायुक्त जस्टिस लोकेश्वर सिंह पांटा के कार्यकाल के पूरा होने के बाद उन्हें एक्सटेंशन देने के लिए कवायद शुरू की थी। वीरभद्र सरकार ने बाकायदा लोकायुक्त एक्ट में भी संशोधन का प्रयास किया, लेकिन केंद्र सरकार से मंजूरी न मिलने के प्रदेश सरकार शांत हो गई। इसके बाद नए लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर कवायद तो हुई, लेकिन चुनावी मौसम में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इस बीच चुनावों के दौरान भाजपा ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए सरकार बनते ही लोकायुक्त की नियुक्ति का वायदा किया, लेकिन साल बीतने के बाद भी इस पद पर सरकार नियुक्त तो दूर, नियुक्ति करने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं कर सकी। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार के लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद प्रदेश सरकार कब तक इस पद पर नियुक्ति करती है।