नोटा का विकल्प देने वाला छत्तीसगढ़ था पहला राज्य, 2014 में पूरे देश में लागू
नोटा का उपयोग पहली बार भारत में 2009 में किया गया था। स्थानीय चुनावों में मतदाताओं को नोटा का विकल्प देने वाला छत्तीसगढ़ भारत का पहला राज्य था। नोटा बटन ने 2013 के विधानसभा चुनावों में चार राज्यों - छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान और मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में अपनी शुरुआत की। 2014 से नोटा पूरे देश में लागू हुआ। बता दें कि विधानसभा चुनाव में नोटा का बटन गुलाबी आैर लोकसभा चुनाव में सफेद होता है।
शिमला
शिमला सीट पर 2014 के चुनाव में 7 उम्मीदवार मैदान में थे। नोटा को तीन उम्मीदवारों से ज्यादा 7787 वोट मिले थे। 2019 में 6 उम्मीदवार थे। नोटा को 8357 वोट मिले। ये 4 उम्मीदवारों से ज्यादा थे। विजेता, उपविजेता प्रत्याशी को ही नोटा से ज्यादा मत मिले।
हमीरपुर
हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में 2014 के चुनावों में 10 उम्मीदवारों में से तीन ही नोटा से ज्यादा मत ले पाए। नोटा को 6,473 वोट मिले। सात उम्मीदवार इतने मत हासिल नहीं कर पाए। 2019 में 11 उम्मीदवार थे। इनमें से नोटा 8,026 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहा। 9 उम्मीदवार इतने वोट भी नहीं ले पाए।
मंडी
2014 के आम चुनाव में 9 उम्मीदवार मैदान में थे इनमें से चार ही नोटा से ज्यादा मत ले पाए। पांच नोटा को मिले 6,191 मतों के बराबर जनसमर्थन भी हासिल नहीं कर पाए थे। 2019 के चुनावों में 17 में से चार उम्मीदवार ही नोटा (5298 ) के बराबर वोट हासिल कर पाए।
कांगड़ा
2014 में हुए आम चुनाव में 12 उम्मीदवार थे। इसमें नोटा 8704 वोट लेकर चौथे नंबर पर रहा था। नौ उम्मीदवारों को इससे कम मत प्राप्त हुए। 2019 के चुनावों में इस सीट पर 11 उम्मीदवार थे। नोटा 11327 मत हासिल कर तीसरे नंबर पर था। नौ उम्मीदवारों को इससे कम मत मिल पाए