हिमाचल में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम ने छह दशकों के सियासी करियर में ऐन मौके पर चौथी बार पाला बदला है। उन्होंने पहली बार 1998 में कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी का गठन किया था।
कांग्रेस के राज में केंद्रीय मंत्री रहते पंडित सुखराम दूरसंचार घोटाले में घिरने के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे। 1998 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को 31-31 सीटें मिलीं लेकिन, सुखराम की हिविकां ने धूमल को समर्थन देकर वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस को महज एक सीट के अंतर से सरकार बनाने से रोक दिया।
भाजपा की सरकार में धूमल मुख्यमंत्री बने। पंडित सुखराम ने इसके बाद वर्ष 2003 में परिवार समेत कांग्रेस में वापसी कर ली। उनके बेटे अनिल शर्मा ने सदर से चुनाव लड़ा और सरकार में मंत्री बने। इसके बाद से सुखराम परिवार वर्ष 2017 तक कांग्रेस में रहा।
लेकिन विधानसभा चुनाव के साल 2017 में वीरभद्र सिंह से नोकझोंक पर चुनाव से ऐन पहले सुखराम परिवार भाजपा में शामिल हो गया। अनिल शर्मा उस वक्त कांग्रेस की वीरभद्र सरकार में पंचायती राज मंत्री थे। अब लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पंडित सुखराम शर्मा ने पोते आश्रय के साथ कांग्रेस का दामन थामा।