अच्छे दाम न मिलने से सेब उगाने लगे लोग
राजगढ़ से 12 किलोमीटर दूर हाब्बन सड़क के साथ भाणत गांव के बागवान देवराज के पास आड़ू के 2000 पेड़ हैं। कहते हैं कि नई दिल्ली में रेट नहीं मिल रहे। सेब की तरह स्थानीय मंडियों में बोली नहीं लगती। लोग मजबूरन आड़ू के पेड़ काटकर अरली किस्मों के सेब उगा रहे हैं। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी एकदम नजदीक है, पर यह इस फसल को फाइटोप्लाज्मा जैसी खतरनाक बीमारियों से नहीं बचा पा रहा है। मनोण निवासी बागवान विनोद तोमर और रविदत्त भारद्वाज ने कहा कि उचित दाम न मिलने पर उन्होंने भी सेब, प्लम व कीवी के बगीचे लगा दिए हैं। हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार ने तीन फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट धौलाकुआं, बागथन और राजगढ़ में स्थापित किए थे, जो अब बंद हैं।
स्व. लक्ष्मीचंद वर्मा ने सबसे पहले लगाए थे आड़ू के पौधे
70 के दशक में भाणत निवासी स्व. लक्ष्मीचंद वर्मा ने सबसे पहले आड़ू के पौधे खेतों में लगाए तो लोग उन्हें ताने देते थे कि उनका परिवार तो भूखों मर जाएगा। उनकी इससे अच्छी आमदनी हुई तो राजगढ़ के एक बड़े क्षेत्र के लोग आड़ू के बगीचे लगाने लगे। 2000 के पहले दशक तक करीब पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल उगाई जाने लगी और उत्पादन 7-8 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा। इसे देखते हुए 5 मई 2005 को तत्कालीन सरकार ने राजगढ़ क्षेत्र को पीच वैली आॅफ हिमाचल घोषित किया। सेवानिवृत्त उपनिदेशक उद्यान डाॅ. एसके कटोच ने बताया कि अब जिले में आड़ू का क्षेत्र घटकर 5-6 सौ हेक्टेयर तक सिमट चुका है और उत्पादन भी मात्र 7- 8 सौ मीट्रिक टन रह गया है।
एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे नेता
पच्छाद कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि पूर्व में भाजपा सरकारों व सांसदों ने राजगढ़ क्षेत्र में आड़ू के उत्पादन में हो रही गिरावट पर ध्यान नहीं दिया और न ही समर्थन मूल्य देने या विधायन के लिए कदम उठाया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सूक्खू जरूर कोई समाधान निकालेंगे। भाजपा मंडल पच्छाद के पूर्व अध्यक्ष प्रताप ठाकुर ने कहा कि वर्षों तक कांग्रेस की सरकारें व सांसद रहे। उन्होंने आड़ू को समर्थन मूल्य दिलाने के या अन्य कोई काम नहीं किए। भाजपा चुनाव के बाद इस मामले को प्रभावी ढंग से उठाएगी।
सेब की ओर रुझान बढ़ने से घटा क्षेत्र : कश्यप
निवर्तमान सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि आड़ू उत्पादन कम होने का कारण लोगों का सेब उगाने की ओर बढ़ा रुझान है। आड़ू में लग रही बीमारी भी एक वजह है। यह सही है कि प्रोसेसिंग यूनिट बंद हो गए। वह जब विधायक थे तो भी आड़ू उत्पादकों की समस्याएं उठाते रहे हैं। सांसद रहते भी इनसे अवगत रहे हैं। इन मसले को आगे और उठाएंगे।
15 सालों से भाजपा के ही रहे सांसद : शांडिल
शिमला संसदीय सीट के पूर्व कांग्रेस सांसद और सुक्खू सरकार में स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल का कहना है कि पिछले तीन कार्यकाल में भाजपा से ही लोकसभा सदस्य चुनकर गए, यह प्रश्न अगर उन्हीं से पूछा जाए तो उचित होगा। पीच वैली का अस्तित्व बचाया जाना चाहिए। आड़ू को अच्छे दाम दिलाकर ही यह संभव होगा।