पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भाजपा के संकल्प पत्र को जुमलों का पत्र करार दिया। उन्होंने भाजपा से पूछा है कि कहीं पुराना ही घोषणा पत्र तो नहीं पढ़ा, क्योंकि इसमें नया कुछ नहीं है। इसमें न तो बेरोजगारों के लिए कोई वादा है, न किसानों के लिए कुछ है।
केवल सपने दिखाए गए हैं। इन्हीं मुद्दों को जनता के सामने रखकर 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। भाजपा 2019 में दोबारा उन्हीं मुद्दों को लेकर देश की जनता को अपने मायाजाल में फंसाने की नाकाम कोशिश कर रही है।
जनता भाजपा की कथनी और करनी में भेद समझ गई है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार का पिछले एक साल का कार्यकाल निराशाजनक रहा है। प्रदेश में नेशनल हाईवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में कोई कार्य नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार ने हिमाचल के लोगों से कई वायदे किए थे, जो पूरे नहीं किए गए। मुख्यमंत्री जयराम बेशक अपनी शराफत की ढाल में अपनी छवि लोगों के सामने साफ-सुथरी दिखाने के कोशिश करने में लगे हैं, लेकिन इससे प्रदेश का विकास संभव नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय आरएसएस के लोगों से घिरा हुआ है।