लोकसभा चुनाव के दौरान धार्मिक और जातीय आधार पर प्रत्याशी या राजनीतिक दलों को वोट मांगना भारी पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी सूरत में धार्मिक और जातीय आधार पर वोट नहीं मांगे जा सकते।
मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों पर भी किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि नहीं की जा सकती। मुख्य निर्वाचन कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि सभी राजनीतिक दलों के घोषित प्रत्याशियों के अलावा नेताओं की भी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
साथ ही नेताओं और दलों को इस संबंध में लिखित तौर पर निर्देश दिए जा चुके हैं। बताया कि आम तौर पर ऐसे स्थलों पर पूजा के नाम पर नेता लोगों में अपनी मौजूदगी दर्शाने का प्रयास करते हैं। कुछ मामलों में राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करने के भी मामले आए हैं।
ऐसे में किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान जिला प्रशासन को खास नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आयोग ने सभी जिलों में जातीय आधार पर आंकड़ों के जरिये रिपोर्टिंग न करने के लिए समाचार पत्रों को भी निर्देश जारी किए हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि दल अगर जातीय समीकरण या उनका उल्लेख अपने भाषणों में करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। समाचार पत्र भी अपने स्तर पर किसी भी ऐसी चीज को प्रकाशित न करें, जिससे मतदान प्रक्रिया पर प्रभाव पड़े।