वर्ष 2014 में भी मोदी लहर में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर चारों सीटें जीती थीं। उस वक्त कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार की 1,70,072 की सर्वाधिक लीड थी। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 45 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा प्रत्याशियों से बुरी तरह हारे कांग्रेस उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी अन्य दलों के प्रत्याशी और निर्दलीय अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।
लोकसभा चुनाव में पहली बार सूबे के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने बढ़त हासिल की। मोदी के आंधी में कांग्रेस के दिग्गज नेता भी अपने गढ़ नहीं बचा पाए। हिमाचल में भाजपा के प्रत्याशियों को कुल मतों के करीब 70 फीसदी वोट पड़े। यह भी नया रिकॉर्ड बना है। चुनाव नतीजों से ऐसा लगता है कि प्रदेश की जनता ने मोदी को एकतरफा जीत दिलाने की मन में ठान रखी थी।
इंदिरा की हत्या के बाद 1984 में बना था जीत का एक लाख से ज्यादा का अंतर
1967 में चौथी लोकसभा से लेकर अब तक के चुनाव में सिर्फ एक बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के चारों लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों ने एक लाख से ज्यादा का मार्जिन हासिल किया था। हालांकि उस चुनाव में भी कोई प्रत्याशी दो लाख का आंकड़ा नहीं छू सका था।
1984 में सबसे भारी अंतर से जीत हासिल करने वाले शिमला से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्ण दत्त सुल्तानपुरी का मार्जिन 1 लाख 96 हजार 291 था। मंडी से सुखराम का मार्जिन 1 लाख 31 हजार 651, कांगड़ा से चंद्रेश कुमारी का 1 लाख 17 हजार 433 और हमीरपुर से प्रत्याशी नारायण चंद 1 लाख 24 हजार 933 के मार्जिन से जीते थे।