दोनों में सियासी लड़ाई के चलते हाईकमान की ओर से पवन काजल और आशा कुमारी का नाम टिकटार्थी की रेस में जोड़ा गया, लेकिन टिकट के लिए सुधीर और बाली ने शिमला से लेकर दिल्ली तक एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन अब बाली का चुनाव लड़ने से मना कर देना कांग्रेस के भीतर नए सियासी समीकरणों को जन्म दे रहा है। माना जा रहा है कि बाली कूटनीति के तहत अब मिशन 2022 पर फोकस कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के सियासी मैदान से पहले वह कूटनीतिक रूप से दो पड़ोसी नेताओं को राजनीतिक हाशिये पर धकेलना चाह रहे हैं। उधर कौल सिंह ठाकुर भी मंडी संसदीय सीट से चुनाव लड़ने की चाह लिए दिल्ली में डटे हैं। चर्चा है कि दिल्ली जाने से पहले कौल सिंह मंडी संसदीय क्षेत्र में अपने करीबियों को फोन करके तैयार रहने और लोकसभा के चुनाव में साथ देने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक मंडी से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में कौल सिंह को उतारने की पैरवी पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह भी कर रहे हैं।