यह है पूरा मामला
शिकायत पीएनबी मंडी सर्कल प्रमुख राजीव खन्ना ने की थी। आरोप था कि 2010 से 2012 के बीच तत्कालीन बैंक मैनेजर अमर सिंह बोध ने ताशी फुंचोग और दौलत राम के साथ मिलकर फर्जी राजस्व दस्तावेज और गैर-भार प्रमाण पत्र (एनईसी) के आधार पर 41 केसीसी लोन मंजूर और वितरित किए, जिनकी कुल राशि 1.83 करोड़ रुपये थी। जांच में सामने आया कि दौलत राम के आवेदनों में उसकी तस्वीर लगाई गई थी, लेकिन ऋण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसी और के थे। जमाबंदी सहित उस पर जाली चार्ज (प्रभार) सृजन रिपोर्ट और अनुसूची घोषणा पत्र भी फर्जी थे। आरोपियों ने तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक बिशन सिंह को भी ऋण स्वीकृत करने के लिए गुमराह किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषियों के खिलाफ अन्य 38 चार्जशीट पर फैसला आना बाकी है। इससे पहले भी दो मामलों में एएस बोध, ताशी फुंचोग, लेख राज, धर्मचंद और बबली शर्मा को सजा हो चुकी है।
ऐसे सामने आया मामला
साल 2010 में दौलत राम ने 4.5 लाख रुपये के केसीसी ऋण के लिए आवेदन किया था। उसने कथित रूप से 2003-05 की पटवारी की ओर से जारी जमाबंदी, केवाईसी दस्तावेज और राशन कार्ड की प्रति का हलफनामा दिया। इसके बाद उसके खाते में राशि ट्रांसफर कर दी गई। बैंक ऑडिट में घोटाला उजागर हुआ। जांच में पता चला कि अमर सिंह बोध ने भूमि पर प्रभार सृजन के लिए तहसीलदार कुल्लू को पत्र भेजा और सूचीबद्ध अधिवक्ता के माध्यम से एनईसी जारी करवाई। पटवारी की रिपोर्ट में भूमि स्वामित्व गलत दर्शाया गया था।